कर्मयोग और कर्मबंधन

आप व्यवहार में भगवान का सुमिरन करते हुए फ़ल की लोलुप्ता छोडते हुए कर्म करते है, तो उनके कर्म कि सुन्दरता बढ़ती है, जो अपने लिये नही करता वह बहुतों के काम आता है, आपके पास जो है वह आपके लिये नही है, हाथ में जो उठाने की शक्ति है तो वह मुंह को खिलाता है, तो औरों के नाम जो है उसका अंश अपने आप आपका भरण पोषण करेगा, इस प्रकार कर्म करो अपना स्वार्थ छोड़कर जिसमे बहुतों का मंगल हो, उस कर्म को प्रयत्नपूर्वक करो, जिस भी कर्म को करने से आपको शान्ति मिलती है वह कर्मयोग है और जिसको करने से टेन्सन मिलता है वह बन्ध, वाहवाही योग्य कर्म करो लेकिन वाहवाही की वासना करोगे तो बन्धन हो जायेगा, कुछ लोग भजन भी करते है तो ये मिल जाये, वो मिल जाये, तो वो बन्धन हो जाता है, हमे तो तेरी प्रीती मिल जाये बस, भगवान श्री कृष्ण जी कहते है, “भजताम‌ प्रीतिपूर्वकम्‌, ददामि बुद्धियोगम्‌ तम” ये दे दो वो दे दो, यह तो तुम भगवान को नौकरी दे रहे हो, मजदूर बना रहे हो उसको। हमेशा भिखमंगे बने रहो ऐसा नही चाहते है वो।

मैने अपने गुरुदेव से कभी कुछ नही मांगा, मुझे आत्मसाक्षात्कार करा दो, ये भी नही मांगा, लग गये बस, हमको मिटने वाले चीज़ों का मोह नही था। सच पूछो तो आप सभी शाश्वत सुख को चाहते हो लेकिन पता नही है। आप सदा सुख चाहते और सदा सुखस्वरूप वह चैतन्य आत्मा है। अनित्यानि शरीराणि।
क्या करिये क्या जोडिये, थोडे जीवन काज
छोड़ि छोड़ि सब जात है, देह गेह धन राज

जहा मौत की दाल नही गलती, दुःख का प्रवेश नही है, जिसको पाने के अलावा और कुछ नही है वह अनुभव आपका आत्मास्वरूप मन तू ज्योतिस्वरूप, अपना मूल पहचान।

जो भी कर्म करो भगवान का सुमिरन करते हुए, ४ बार नारायण नारायण नारायण नारायण का जप करो। नर-नारी के अयन, श्री नारायण। दुकानदार आये तो उसका मंगल हो और आपका गुजारा हो जाये। किसी अपराधी को सज़ा देनी है तो उससे उसका हित हो, ये नही कि किसी के कहने में आकर, कोई हमारे लिये गलत बोलता है तो हम उसके लिये कुछ बुरा नही सोचते, बुरा सोचकर हम अपना मन क्युं खराब करे। मैने ये किया, वो किया, मैने इतना किया, मै मन्दिर गया, आश्रम गया, लेकिन मुझे तो कुछ प्राप्त नही हुआ तो भाई ये तो आप फ़िर संसार को चाहते हो भगवान को नही, अच्छाई के कर्म करो लेकिन सूझबूझ रखके ऐसे नही जैसे एक बार एक जेल के लोगों ने रामलीला रखी तो हनुमान बने जिस कैदी को संजीवनी बूटी लाने को जेल के बाहर भेजा तो वह वापिस ही नही आया, अच्छा काम शास्त्र अनुरूप होना चाहिये, ऐसा नही कि कोई हमे उल्लु बना दे, इस ढंग से निष्काम कर्मयोग काम करने से पहले आराम, बाद में आराम लेकिन काम करते हुए भी आआराआअम्म्म्म्म, अब यहां जो भी सेवक है सब बस लगे ही रहते है, उनको सत्संग में आने का लालच नही बस लगे ही रहते है, लेकिन जो बेइमान होते है उनको थोडा होता है, लेकिन हमारे यहां तो ऐसे बेइमान सेवक ज़ीरो और ना के बराबर है, हमारा अनुशासन अच्छा है।

उत्तम सेवक सेवा खोज लेते है, मध्यम को संकेत करना पड़ता है, कनिष्ठ को आज्ञा देनी पड़ती है लेकिन कनिष्ठ तो बस ऊपर ऊपर की मलाई खाना चाहते है बस इससे तो तुम अपनी अध्यात्मिकता का ही नुक्सान करोगे बेटे।

एक पक्का करलो बस कि शरीर आपका नही है और संसार आपके साथ नही रहने वाला है तो आपका कर्म, कर्मयोग बन जायेगा, सारे शरीर जिसकी सत्ता से है, वह प्रभु मेरा है।

२ महिला जिनमें से एक अपने पति कि दी हुई नथ की तारीफ़ कर रही थी, उनकी बात सुनकर श्री कबीरजी ने कहा :
नथनि दीनि यार ने, स्मृति बारंबार
नाक दिया करतार ने, ताको दिया बिसार

तो भौतिकता में भगवान को मिला लिया, होना ये चाहिये कि भौतिकता में भगवान की सत्ता, माधुर्यता और करुणा को देखना शुरु कर दो, एक होती है प्रतिक्षा और एक होती है समीक्षा, प्रतिक्षा ऐसी वस्तु की की जाती है जो अभी मौजूद नही है। भगवान की दया कही दूर नही है उसकी समीक्षा करो, आपकी समीक्षा ईश्वर प्राप्ति करने वाली हो जायेगी, भगवान श्री कृष्ण जी वासुदेवजी के मन में, देवकी जी के तन में, नन्दबाबा के हाथों में थे लेकिन यशोद मां के हृदय से तो बार बार लगते थे। यशोदा माने, सारा यश भगवान को जो देती थी, ईश्वर तो फ़िर ईश्वर है, चाहे उनको अल्लाह कह दो या गाड। मेरे हृदय में किसी पार्टी, नेता से नफ़रत नही है, मै देखता हू कि मेरे हृदय में ऐसा कुछ न हो क्योंकि इससे मेरा ही नुक्सान है। “एक नूर ते सब जग उपजा, कौन भले कौन मन्दे”ये ऐसा है, वो ऐसा है, समझने के लिये थोडा सावधान हो जाओ, जो जैसा है वैसे व्यवहार में भिन्नता है लेकिन भीतर से नही हो तो तुम्हारा अध्यात्मिकरण हो गया।।

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27 टिप्पणियाँ on “कर्मयोग और कर्मबंधन”

  1. beenu mishra Says:

    kripya mujhe bataye ki rajswala mahila ko kitne dino bad mala karni chahiye

  2. Rohit Says:

    Hari Om Didi

    Please read Mahan naari or ‘Mantra jap & Anusthana vidhi’ published by ashram.

    For further clarification, please visit the query board of http://www.hariomgroup.org

    om
    rohi

  3. virender kumar rawal Says:

    hari om
    i am a saadhak. i thank u for doing seva for bapuji in this way. Really you people have the real sense of satsung. May bapuji bless u with his blessings.However i was not aware about this hariom group .
    Yours
    virender Kumar rawal


  4. Hari om ji Guru om ji
    Hari om ji aab satsang kish jangah par hone vala hai. batane ki kirpaya kare hari om ji guru om ji sai om ji.


  5. Pujay bapu ji ka haridwar me satsang hai. ki pornima darsan.parbhu ji battne ki kirpaya kare. hari om hari om


  6. hari om ji i am a sadhk. or mai ahamdabad ashram me rahan chahata hu. kuch dino ke liye. kirpa bataye ki vaha paar rahne ke liye mujhe kaaya karna hoga. HARI OM , HARI, OM

  7. Yogendra Says:

    @ DEEPAK

    Hari Om Deepakji !

    There are nice arrangements in Ahmedabad Ashram ( Sant Shri Asaramji Ashram Ashram, Ahmedabad ), for Saadhaks who want to take advantage of ashram’s divine environment. Saadhaks are permitted to live in Ashram ONLY for practising Spiritual retreats ( Anush-thaan), Maun Mandir Saadhana, etc.

    So, You can go ahead and take advantage of ashram’s divine environment. It is better to get confirmed whether rooms in Saadhak Niwas are available or not, well in advance.The confirmation can be sought over phone.

    Hari Om !
    Yogendra


  8. main deesha lena chahta hoon lekin parents ki permission nahi hai, aapko maloom hai ki ma bap mere liye bhagwan ki tarah hai, unki permission ke bina deesha nahi le sakta, andur se yha lagata hai ki bapu ji mujhe bula rahe hain.

    hari om
    amit

  9. Raghaw Chawla Says:

    @ Dr. Amit Chauhan

    Mira, an ardent devotee of Lord Krishna was under tremendous pressure from the in-laws family; they were against her going out of the palace or calling satsang inside the palace; even her saintly life-style and engrossment in her devotion of Krishna was unbearable to many of them.

    Helpless Meera wrote to her contemporary saintly poet Goswami Tulasidas to advise her about what she should do; what should be her duty in those circumstances?

    Tulsidas explained to her that; such was the law of the world; circumstances don’t change according to one’s ideals or resolutions. One has to change one’s attitude, mental conditioning for the desired results.

    In fact, he sent her a couplet of poetry that said ––

    Jake Priya Na Rama Vaidehi, Tajiye Tahi Koti Bairi Sama Yadyapi Param Sanehi |

    (Meaning: You should leave those who do not love Lord Ram and Sita (Father-Mother God) even if they happen to be your nearest ones).

    जाके प्रिय न राम-बैदेही ।
    तजिये ताहि कोटि बैरी सम, जद्यपि परम सनेही ॥ १ ॥

    सो छाँड़िये
    तज्यो पिता प्रहलाद, बिभीषन बंधु, भरत महतारी ।
    बलि गुरु तज्यो कंत ब्रज-बनितन्हि, भये मुद-मंगलकारी ॥ २ ॥

    नाते नेह रामके मनियत सुहृद सुसेब्य जहाँ लों ।
    अंजन कहा आँखि जेहि फूटै, बहुतक कहौं कहाँ लौं ॥ ३ ॥

    तुलसि सो सब भाँति परम हित पूज्य प्रानते प्यारो ।
    जासों होय सनेह राम-पद, एतो मतो हमारो ॥ ४ ॥

  10. Prashantbhai Says:

    Very great all sender/devlopers and reader ….
    I.m also yor Gurubhai Living In Ashram… We are making a site as.. http://www.sanatanseva.com, requirs for your opinion and priceless posting and matters..
    bcoz this site is especialy making for truth…. have serve to samaaz or social…
    what;s BAPUJI and other indian saint….
    Just bear us… hariom…

  11. veerendra kumar Says:

    HARIOM………….
    m veerendra kumar …….
    my father expired on 18th october 2007……..
    all d formalities have been done , that is death ceremony is all over …
    he was 101 years old…….
    before this happened i use to do ” jaap of Guru deeksha mantra ” but from 18th i am not doing any thing……….

    i just want to know that can i start my pooja as it was before 18th……… or if not now then after how much time or how many days i can start my ” pooja and mala ” regularly………..

    please suggest me the right path because m unable to decide anything………..

    HARIOM

  12. ashish ranjan Says:

    Hari Om everybody

    Guru ji ki kripa hum sub pey bunni rahey aur woh hamara haath pakrey rahein aur hume uspaar ley challein..hum haath pakreyngey to haath choot jane ka khutra hai,gurudev pakrengey to PAAR karadengey..
    jai ho baba ki .hum loog dhunya hua aise guru sri ko paakey..

    Hari Om

  13. MAHESHDESHMUKH Says:

    MAI MALA JAP KARTE VAKTH MUJHE CONCENTRATION NAHI RAHETHA ,MUJHE CONCENTRATION RAHENE KELIYE KYA KARNA CHAHIYE , CAN U TELL ME PLZ

  14. Amit Kumar Says:

    MaheshDeshMukh Je , Aap jab bhe dhyaan lagane baitho us time aap apne dono ankho ko band karke kewal apne sanso ke gati pe dhyaan diya karo , Aap ko bas yeh dekhna hai ke aap kaise saans ander le rahe ho aur kaise aap saans ko bahar chod rahe ho . aapka pura dhyaan kewal apne saanso pe hona chahiye , aapke concentration apne aap he ban jayegi.

  15. deepak darwade Says:

    HARI OM HARI OM HARI OM NARAYAN NARAYAN NARAYAN NARAYAN
    MAIN BADA BHAGYASHALI HU KI MUJHE AAJ HINDI MAIN PARAMPUNYA SADGURU KE SATSANG KA AMRUT MILA HARI OM HARI OM HARI OM HARI OM

  16. Amit Kumar Says:

    Narayan,Narayan,Narayan,Narayan
    Sabhe Sadhak Bhaiyo aur Bahano ka Mangal ho..

  17. arvind Says:

    hari om

    prabhu main aashram me rahna chahta hoon humne kai baar phone bhi kiya parantu vaarta na ho payi main hamesha ke liye aashram me aana chahta hoon maine bapu jee se vidyarthi mantra 5 saal pahle paya tha
    kripa karke margdarshan kare . hari om

  18. Gopal Shukla Says:

    Guru ji main aap se bat karna chahta hun ,

    ap se milna chahta hun,
    Bhagwan ko Prapt Karna Chahta hun,

    Mera man bahut kamjor hai
    Pls mujhse bat karo

    Apka Shisya
    GOPAL SHUKLA
    DELHI
    09718180602
    011-64714011

  19. sampat Says:

    guru kripa se maine bajan banaye hai aap ko chahia to please mail me OR mibile 09828537627 sampat sharma ajmer Raj.

  20. SUBODH SAGAR Says:

    Mere Pyare Gurudev Aapke pavasn Shree Charno Me Sastang Dandwat Pranam…
    Mai Bas aap ka Darshan karna chahta hoon Bhale Sapne me aap Padhare … aur Mujhase baat kare …. mere kuchh samsyaye hai jo sadhna se sambandhit hai….

    Please Gurudev meri madad kijiya

    subodh sagar
    surat Gujrat

  21. SUBODH SAGAR Says:

    Mere Pyare Gurudev Aapke pavasn Shree Charno Me Sastang Dandwat Pranam…
    Mai Bas aap ka Darshan karna chahta hoon Bhale Sapne me aap Padhare … aur Mujhase baat kare …. mere kuchh samsyaye hai jo sadhna se sambandhit hai….

    Please Gurudev meri madad kijiya
    mai aaj sapne me aapka darshan kiya jisme aap mujhse bahut naraj lage ……
    mai aaj pure din tenshion memhi hoon
    please Gurudev meri madad karen…..

    subodh sagar
    surat Gujrat

  22. SUBODH SAGAR Says:

    Thanks to greatest Gurudev
    We are the child of your and we wish the werry well for your long life
    crieting more & more powerfull energy..

    Thanks a lott………..

  23. nirmala Says:

    pranam gurudevji,
    aapke krupa se humare ghar mein khushiyon ka mausam cha gaya hain aur hum aapse vinti karte hain ki humare matha pitha ko sada khush rakhiye aur hum bachon ko aapki sada aashirvaad dijiye .aapke diksha ke lene se humare sare dukh dur ho gaye.
    aise hi aapki aashirvaad hum par khushiyon ka mausam ki tarah baraste jaye bapuji
    aapka bahut bahut daniyavaad jiske liye hum aaj bahut khush hain.
    i wish a long life to u bapuji as i want to meet u 4 many more years


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