दीक्षा की महिमा

30th Jan. 2013

Jabalpur
 
जरा-जरा बात में माताए, बहेने बेचारी ऐसे ठगी जाती हैं, डरा देते हैं | बोले गर्भ का विकास नही है, बच्चे की आँख नही है, किडनी ठीक नही है, दिमाग नही है | बस गर्भ-पात कराओ अथवा तो बच्चा ही नही है, गांठ है | मैंने कहा गांठ-वाँठ नही है, तुम देखो क्या होता है | फिर कहते हैं बापूजी आपने बच्चा बना दिया | मैंने नही बनाया वो तो था ही, मैं काहे का बनाया | डॉक्टरों ने बोला लड़की है, बापू स्वप्ने में आये बोले गर्भ-पात नही कराना | बापूजी उस लड़की को आपने लड़का बना दिया | मैंने नही बनाया वो तो लड़का ही था | मैं काहे को झूठा यश उठा लूँ | ऐसा कुछ नही होता वो था ही लड़का बता देता है लड़की ताकि गर्भ-पात के पैसे कमाओ | अच्छे डॉक्टरों को तो मैं खूब हृदय से लगता हूँ | बाकि जो गुमराह करती है उनको थोडा चेतावनी दे देता हूँ | माईयों के साथ अत्याचार ना हो | ऐसी-ऐसी माइयाँ हैं जिनको देख कर दया आ जाये | बिन जरूरी सिजेरियन कर दें | बेटियों की परेशानी देखकर तो बाप को तो दुःख होगा | मैं तो पिताजी हूँ | जो तो ठगते हैं उनको हरामी बोल दिया तो क्या है | महिलओं को ठगते हैं, बच्चों की हत्या करते हैं | और पिता वैसे ही अपने बच्चों को छोरा तू तो हरामी है | 
अब्राहम लिंकन, प्रेसिडेंट ऑफ अमेरिका, मानवतावादी था | लेकिन ईश्वर से जोड़ने वाली सत्ता के आभाव में अभी बिचारा व्हाइट हॉउस में कभी-कभी प्रेत के रूप में दिखाई देता है | वहाँ के समाचार पत्रों के आधार पर | ऐसे ही राजा अज साँप की योनी में भटका | राजा मृग किरकिट बन गया | श्री कृष्ण ने उसकी सद्गति की | बड़ा प्रसिद्ध राजा था | बुद्धिमान था तभी इतना प्रसिद्ध हुआ | लेकिन दीक्षा के बिना मरा तो किरकिट की योनी में जा गिरा | राजा भरत जिसके नाम से भारत नाम पड़ा, अजनाबखंड का, वो हिरन की योनी में चला गया | इसलिए दीक्षा बहुत जरूरी है | भगवान राम ने भी दीक्षा ली थी वशिष्टजी से | भगवान कृष्ण के भी गुरु थे | निगुरे आदमी का तो सब व्यर्थ है | जिसने दीक्षा लिया और माला पे जप करता है, वो माला गले में पड़ी है और कुछ भी दान-पुण्य करता है, तो उसका १००० गुना फल होता है | स्नान करता है, जप करता है, ध्यान करता है, माला गले में है | शौचालय में माला गले में पहन कर नही जाना चाहिए | अगर माला गले में है तो माला सहित स्नान कर लें | फिर माला धो के पहन लें | 
मासिक दिनों में माला गले में नही हो ५ दिन | मासिक दिनों में मंत्र जपे लेकिन ओमकार नही जपे | जैसे हरी ओम है तो हरी | ओम नमह शिवाय मंत्र है तो शिव | ओम गुरु मंत्र है तो गुरु | ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र है तो वासुदेव | ओम ऐम नमह मंत्र है तो कभी-कभी ऐम नही तो खली नमह ओम नही जपना है | 
मेरे शिष्यों को हार्ट-अटेक कभी ना हो, हाई बी.पी., लो बी.पी. कभी ना हो | अगर है तो आशीर्वाद मंत्र जप करो, भाग जायेगा हार्ट-अटेक, हाई बी.पी., लो बी.पी. | पति-पत्नी के झगड़े कभी ना हों | अगर झगड़े हैं तो १० माला जप करोगे थोड़े दिन तो झगड़े भाग जायेंगे | शनि देवता का ग्रह मेरे शिष्यों को नही होना चाहिए | अगर है तो १०० माला जप करो | शनि देवता आशीर्वाद देके, चाहे साढ़े सात साल के हों चाहे १२ साल के आये हों चले जायेंगे | मेरे शिष्यों को पीलिया ना हो, लीवर खराब ना हो | अगर है तो १ चुटकी चावल रखो, १ घूँट पानी रखो | और वो आशीर्वाद मंत्र ५० माला जप करो |१-२ दिन में पीलिया ठीक हो जायेगा, लीवर ठीक हो जायेगा | २६ लाख रुपया लेते हैं फिर भी लीवर ठीक नही होता | यहाँ २६ पैसा भी खर्च नही होता | एक चुटकी १ दिन में, २ चुटकी २ दिन में बस | २६ लाख भी बच जायेंगे | कुटुम्बी की लीवर काट के डालते हैं, कुटुम्बी भी बच जायेंगे | और सक्सेस १००% | 
ऐसे ही दमे की दवाई भी नही है | फू-फा कराते-कराते लंगज खराब कराते | दमे की दवा हमारे वैद्यों के पास है | 
अपेंडिक्स हो, ऐड़ी का दर्द हो तो पेट की शुद्धि से ठीक हो जाता है | ऑपरेशन नही कराना कोष्ट शुद्धि से ठीक होता है | पेट की खराबियों से विजातीय द्रव्य इकठे होते है तो दर्द होता है | शुद्धि हो गयी, कचरा निकल गया तो बस साफ | 
जिनको सिर दर्द हो, मंजन करते समय, पेस्ट नही करना चाहिये | जिनको गर्मी में आँखे जलती हों तो उनको मिर्च और तली हुई चीजे कम कर देना चाहिये | और धनिया, सौंफ और मिश्री ५०-५०-५० ग्राम मिश्रण करके रख देना | शाम को ३-४ बजे भीगा दे | सूर्य अस्त होने के पहले उसको छान के पी ले | पित भाग जायेगा | अधिक मासिक, सिर दर्द उसमें आराम मिलेगा | और मंजन करते समय सिर दर्द वाले या कोई भी कटोरी में पानी लेकर, घूँट मुँह में ले लिया | फिर आँख डूबाई और आँख फट-फटाया | तो आँखों और दांतों के द्वारा गर्मी खिचके सिर दर्द में आराम मिलेगा | गाये के घी का नस्य लेने से दिमाग के दर्द सब गायब | लेकिन गाये का घी शुद्ध मिले तो | सिरका और दूधि का तेल भी डालने से अच्छा रहता है | जो बहेरे हैं वो कण में प्याज का थोडा रस डाल दे | 
दीक्षा की महिमा
कलयुग में जो छोडकर मरना है वो चाह रहे है, ऐसी बुद्धि हो गयी है | तेरी प्रीति दे दे, तेरा नाम दे दे, मैं तुझे पा लूँ, ऐसे ग्राहक नही मिलते भगवान को | जो दीक्षा लेते तो वो ग्राहक भगवान के हो जाते हैं | भगवान दयालु हैं देखते हैं मेरे सिवाय तो जीव का कल्याण तो होने वाला नही | चाहे कितना धन मिले | सोने की लंका मिल गयी, फिर भी रावण का कल्याण नही हुआ | शबरी भिलन को गुरु की दीक्षा मिल गयी, फिर तो शबरी भिलन का अकल्याण नही हुआ, महाकल्याण हो गया | मीरा को रहिदास गुरु की दीक्षा मिल गयी, कल्याण हो गया | सदना कसाई, धन्ना झाठ, समाज में बोले २ पैसे के आदमी लेकिन गुरु की दीक्षा से महान बन गये | देवताओ के भी गुरु होते हैं, भगवान के भी गुरु होते हैं | मनुष्यों के भी गुरु होते हैं | अध्यात्म गुरु के बिना मनुष्य जन्म व्यर्थ है | शास्त्र में तो यहाँ तक लिखा है जो निगुरा है उसके हाथ का जल और भोजन, विष्ठा और मूत्र तुल्य है | कबीरजी ने भी निगुरे लोगो को लानत दी है | निगुरे का नही कोई ठिकाना, चौरासी में आना-जाना, यम का बने महेमान | सुन लो चतुर सुजान निगुरा नही रहना || निगुरा होता हिय का अँधा, खूब करे संसार का धंधा | पड़े नर्क की खान || कहाँ राजा मृग और किरकिट हो गया | नर्क ही तो है | पड़े नर्क की खान || सुन लो चतुर सुजान निगुरा नही रहना || गुरु बिन माला क्या सटकावे, मनवा तो चाहू दिशा जाये || यम का बने महेमान | सुन लो चतुर सुजान निगुरा नही रहना || हिरा जैसा सुंदर काया, हरी भजन बिन जन्म गवाया | कैसे हो कल्याण | निगुरे नही रहना || सुन लो चतुर सुजान निगुरे नही रहना || 
आचार्य विनोभा की माँ की कथा
आचार्य विनोभा की माँ रघुनाई रात को सबको भोजन कराके भगवान के आगे प्रार्थना करती, जो कुछ हुआ तुम्हारी सत्ता से हुआ | गलती हो गयी तो माफ़ करना, मुझे अपनी भक्ति देना | हे देव, हे ईश्वर तुम्हारी भक्ति देना | तुम्हारी माया में ना फसूं | जो तुम्हारी शरण आता है, उसको तुम पार क्र देते हो | मैं तुम्हारी शरण हूँ, हे गोविन्द, हे गोपाल, हे अच्युत | हे अन्तर्यामी देव, माझा देवा | आँखों में से आंसू आते | विनोभा लिखते मेरी माँ के वो आंसू देखकर मैं बड़ा प्रभावित होता | फिर मेरी माँ सोते समय दही जमाने को, भगवान को बोलती हे मेरे भगवान मेरी दही अच्छी जमा देना | मैं छोटा था तो सुनता था | जब बड़ा हुआ तो माँ को एक दिन टोका मैंने | अब दही जमाने में भगवान को क्यों घसीटती हो ? दूध गर्म हुआ और फिर दही के लायक हुआ तो दही डाल दो तो दही जमता है | जामन डालने से, इसमें भगवान को क्यों घसीटती है के भगवान तुम दही जमा दो | तो माँ ने मेरे को सुनाया अरे विनिया, तुझे पता नहीं सब नियम भगवान की सत्ता से हैं | दूध में जामन डालो और दही बने ये भगवान ने ही किया है न | तो अभी मैं भगवान को याद करके करूंगी तो भगवान के भाव से वो दही जायेगा तो अच्छा जमेगा | 
विनोभा लिखते हैं मैं जेल में था और दही जमाने को खूब सावधानी रखता था | फिर भी दही कभी जमे, कभी नही जमे, कभी पानी छोड़े, कभी खट्टा हो जाये | माँ के हाथ जैसी दही नही बनती थी | 
मैं ६० करीब हो गया हूँगा तो मेरी माँ ८०-८५ की थी | तबियत भी खराब थी | मेरी माँ को मैंने बोला मैं तुम्हारे हाथ की रोटी खाना चाहता हूँ | मेरे को पता है माँ को तो बुढ़ापा है, मेरे को तो रोटी खिलने वाले लाखो लोग हैं | फिर भी मैंने माँ को बोला, के माँ के हाथ की रोटी का स्वाद ही कुछ निराला है | 
ऐसे ही देवियाँ-माताए अपने बच्चो के लिए भगवान का नाम जपते हुए आटा घून्धो | पति को, पुत्रो को, भगवान के लिए बनाओ | आपका रसोई बनाना भगवान की भक्ति हो जाएगी | फिर प्रभुजी को खिला दो | भगवान को भोग लगा दिया फिर उनको दिया, उन में भी तो भगवान ही खा रहे हैं | क्या करें रसोई बनानी पडती है, माला नहीं होती | अरे माला तो माला रहे लेकिन रसोई को भी माला बना दे | रोने को भी माला बना दे | हे प्रभु, अभी तक संसार सच्चा लग रहा है, सुख-दुःख सच्चा लग रहा है | ऐसे दिन कब आयेंगे के तू सत्य स्वरूप है बाकि सब सपना है | हरी…..ॐ…..हरी ॐ…….| ओ रोना भी हसने में बदल जायेगा | भगवान के साथ कैसे भी करो | पंगा लेना है तो भगवान से लो | लड़ाई करना है तो भगवान से | मथा टेकना है तो भगवान से | सबसे बड़े भगवान, उनसे नाता तो जुड़ जाये | तुलसी अपने राम को रीझ भजो या खीझ, भूमि फेके उगेंगे उलटे-सीधे बीज || शिशुपाल ने भगवान का वैर से नाम लिया तो भी सद्गति हो गयी | पूतना ने भगवान को जहर पिलाया, तो भी सद्गति हुई | यशोदा ने भगवान को मक्खन खिलाया तो भी सद्गति हुई | तुलसीदासजी ने तो भगवान को ऐसे उल्हावने दिए की उनके प्रेम की महानता छलकती है | भगवान को बोलते हैं अँधा-धुन्धी है सरकार तुम्हारी | देखो भगत की कितनी ताकत होती है | बच्चे की कैसी ताकत राजा के कंधे चढ़ जाये | ऐसे ही भगत भगवान के कंधे चढ़ जाये | महाराज अँधा-धुन्धी है सरकार, रीझे दिनी लंक और खीझे दीन्हे परमपद || आप रीझ गये विभीषण पर तो लंकेश बना दिया और खीझे रावण पर तो, पत्नी ले गये, तो परमपद दे डाला | अपनी पत्नी ले गये उसको परमपद दे दिया | और जिसपर रीझे उसको लंक दी | भगवान को बोलो आप तो ऐसी सरकार हो चाहे जैसे हो, पानी में से मोती बरसा देते हो, गूंगे को बोलना सिखा देते हो | कुत्ते के मुंह से मनुष्य की भाषा करा देते हो | हेलिकॉप्टर चूर-चूर होकर पब्लिक के बीच गिरे और सब को बचा लेते हो | कैसी सरकार हो प्रभुजी, प्यारेजी, मेरेजी | भगवान के साथ बाते करो जरा | कभी-कभी हम तो बोलते हैं हे हरी तो बोलता है क्या है | हम तो बहुत मस्ती करते हैं गुरूजी से, भगवान से | 
अपने गुरूजी से वार्तालाप
एक बार गुरूजी को कहा हे मेरे साईं | बोले नही है बात करनी | बोले क्यों ? बोले इतने दिन आया नही, बोलता नही, बुलाता नही | नही बात करनी | अभी भी तो कर रहे हो | नही बात करनी ऐसे करके भी तो कर रहे हो मेरे साईं | बड़ा मजा आया गुरूजी से भी | साईं भी खुश और हम भी खुश | ऐसे भी भगवान से बाते किया करो | खूब आनंद आएगा | अभी देखो कितना आनंद आ रहा है | मेरे को भी आ रहा है | रोते बच्चे थोड़े ही अच्छे लगते हैं, हंसते बच्चे प्यार वाले बच्चे अच्छे लगते हैं | भगवान बोलते हैं खुद के मैं आत्मदेव हूँ | सबके अंदर हूँ | भगवान अपना एड्रेस बताते हैं | ईश्वरो सर्वो भूतानाम, हृदयसे अर्जुन तिष्टति, ब्राह्म्य्म सर्व भुतानी, यंत्र रुड़ानी मायया || मैं ईश्वर सब के हृदय में हूँ, लेकिन मन के यंत्र पर, बुद्धि के यंत्र पर चिंता के यंत्र पर, विकारो के यंत्र पर सब भ्रमित हो रहे हैं | फिर भ्रमित होते हैं तो माया | तो बोले हाँ मुझ देव की माया है | भगवान सत्य स्वीकार ने में देर नही करते | क्योंकी सत्य स्वभाव है भगवान का | भगवान कहते हैं देवी हेशा गुणमयी मम माया धृत्या || ये ३ गुण वाली मेरी माया बड़ी दुस्तर है | कोई शराब-कबाब में सुख खोज रहा है | कोई धन-दौलत बढ़ाने में सुख खोज रहा है | कोई पूजा-पथ में सुख खोज रहा है | और मानता है के ये तो लाभी है | मैं तो पूजा-पथ कर रहा हूँ | कोई बोलता है ये तो शराबी है, मैं तो धनवान हूँ | ऐसे-ऐसे अहम में भर जाते हैं | 
४ मवाली थे बोले मौन रखने में बड़ी शक्ति है | चलो आधा घंटा मौन रखे | मौन तो शुरू हुआ, ५ मिनट में बोला यार, चाबियाँ मैं दुकान की अपने पास लाया हूँ | घर वाले खोजते होंगे | अरे बोले मौन खोल दिया बेवकूफ कहीं का | तीसरे ने कहा बेवकूफ कहीं का मौन खोल दिया ऐसा बोलके तुम भी तो बेवकूफ हो गये | चौथा बोलता है सबसे भले हम अभी तक नही बोले | चारो ने बोल दिया और बोलते हैं सबसे भले हम अभी तक नही बोले | अभी तक नही बोले भी तो बोल दिया | इसी का नाम माया है, उलझ जाते हैं सब | अपने को किसी चीज, वस्तु का मालिक मन लेते हैं | अब शरीर अपना नही है और ये मेरी है, ये मेरी है | इसको ठीक करूं, उसको ठीक करूं | अप्ब्ने को तो तहिक करना छोड़ देते हैं, दुसरो को ठीक करते हैं | ये मेरी माया है | तो भगवान आपकी माया से कैसे तरे ? भगवान बोलते हैं ये माम प्रपनते, वे जो मुझे प्रपनते होते हैं, मुझे सुमिरते हैं, मेरा ज्ञान पाते, वे मुझे पा जाते हैं | जैसे मछुवारा चारो तरफ जाल डालता है, लेकिन जो मछली मछुवारे के पैरों में घूम रही हैं, उनपर मछुवारे की जाल नही जाती | ऐसे ही जो भगवान की शरण जाता है, हरी ॐ….भगवान में आ गये फिर माया में नही फंसोगे | १५ मिनट रोज करो माया से पार हो जाओगे |  
मेरी माँ को देखकर वैद्य ने कहा नाडी विपरीत चाले | मैं गया माँ के पास तो माँ बोली अब मुझे जाने दो | मेरी माँ मेरेको गुरु मानती थी, संत मानती थी | ये उसकी महानता है | बोले मेरे को प्रभु जाने दो | मैंने कहा मैं नही जाने दूंगा | कैसे जाती हो मैं देखता हूँ | मैं आगया संतत्व की मस्ती में | बोले क्या करूं ? मैं मन्त्र देता हूँ | आरोग्य का मन्त्र दिया |और तुलसी, निम्बू का रस देना शुरू किया | रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ गयी | २० ग्राम तुलसी का रस और एक निम्बू पिलाओ रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ जाती है | १ घंटे में मर जाने वाली अब २० घंटे से ज्यादा नही जी सकती, २ घंटे में भी मर सकती है |लेकिन मैक्सिमम २० घंटे | वो माँ तो ठीक होने लगी, २० घंटे हो गये, २० दिन हो गये | अमेरिका के मेरे भक्त आकर देखे लीवर ठीक कैसे हुआ ? किडनी ठीक कैसे हुआ ? ये पीछे के मनके कैसे ठीक हुए | ५०-६० महीने हो गये | कुछ डॉक्टर अच्छे डॉक्टर होते हैं न, समाज में सभी बुरे थोड़े ही होते हैं ? तो अच्छे-अच्छे डॉक्टर हंसी करते, माताजी तुमतो मरने वाली थी, अभी तक जिन्दी हो | तो मेरी माँ भी जरा चुटकी लेती मर जाएगी-मर जाएगी कहने वाले तो बहुत थे उसमें तो कई मर गये | मरना है तो तुम मरो, मेरे पासा मेरे भगवान का मन्त्र है | लो, बीटा प्रसाद खाओ | मेरी माँ भी बड़ा मजाक करती थी | मेरी माँ ८६ साल की थी, ९३ उस समय लीवर-बीवर सब ठीक | ॐ खम-खम समझ गयी मते-बहने-बिटियाँ | 
गाय का महत्व
प्रसूति होते समय, ओपरेशन कराओ, बच्चा टेढ़ा हो गया है, ऐसा है वैसा है | तो गोधरा में एक बहुरानी पहली बार माँ बन रही थी | उसका गर्भ टेढ़ा हो गया, सूज गयी | गोधरा के होस्पिटल ने कहा के जल्दी से पेट चिराओ | उन्होंने सुना हुआ था, मेरे भगत थे | डोक्टारो ने कहा जल्दी पेट चिराओ बच्चे को निकालो दोनों में से कोई १ बचेगा | उन्होंने कहा बापू ने मना किया है | तो फिर अहमदाबाद ले गये | गोधरा से बरोदा, बरोदा से अहमदाबाद | अहमदाबाद में बड़े-बड़े अच्छे डॉक्टर थे | फिर उन्होंने समिति वालो को फोन किया | बोले अब तो सभी बोलते हैं या माँ बचेगी या बालक बचेगा और जो बचेगा वो मेंटली रिटायर होगा | जल्दी से सिजेरियन कराना पड़ेगा बापू आज्ञा दे दो | मैंने कहा नही आज्ञा नही देते | गाये के गोबर का रस ले लो १० ग्राम भगवान का नाम जप करके पिलाओ आधा-पौना घंटे में प्रसूति हो जाएगी | नही हो तो फिर पिला देना | वो तो मेरे को मानते थे | मेरी आज्ञा के सिवाय कैसे कराए ? दे दिया गाये के गोबर का रस | वो बेटी भी चंगी, माँ भी चंगी | दूसरी बेटी हुई, तीसरा बीटा हुआ | सबके सब चंगे | ना माँ मरी, ना बच्चे मरे, ना मेंटली रे\रिटायर हुए | गाये में सूर्य के गौ-किरण पीने की सूर्य केतु नाडी है | इसलिए गाय का दूध पवित्र, गाय का झरण पवित्र, गाय का गोबर पवित्र | मरते समय भी गाये के गोबर का लेपन | है तो डबल गाय का, है तो सिंगल और डबल गाय का मरते समय वहां छिटकाव करते हैं | और श्मशान में भी जाते हैं तो गाय के गोबर का कंडा जलाते हुए जाते हैं ताकि मुर्दे के जो बैक्टेरिया हैं वो दुसरो को तंग ना करें | इतनी ऊँची हमारी संस्कृति है | तो गाय का दूध २ रूपये ज्यादा मिले भेंस से तो भी लेना चाहिए | गाये पालनी चाहिए पाल सकें तो | और कोई बीमार है और डॉक्टर बोले ये ठीक नहीं हो सकता | उस बीमार के आगे गाये रख दो | गाये को थोडा-बहुत खिलावे अपने हाथ से | और गाये के शरीर पे हाथ घुमाये | गाये की प्रसन्नता के वेवज निकलेंगे | उसकी आँख, ऊँगली के अगले भाग से | उसकी रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ेगी और निरोग हो जायेगा | ६-१२ महिना करे | असाध्य रोग भी मिट जाते हैं | 
गठिया की बीमारी है तो ॐ बम-बम जप करे सवा लाख शिवरात्रि के दिन | गठिया सदा के लिए गायब | वायु सबंधी बीमारी है, गैस है, तो १ लिटर पानी में ३ बिली पत्ते, २-३ काली मिर्च डाल कर उबालें अथवा जरा सा अज्वैन | उबाल कर पौना लिटर करें | और वो पानी पुरे दिन पिए | वायु शांत | पीत है आँखे जलती हैं, तो २ लिटर पानी उबल के १ लिटर बना ले | और वो पिए, पीत शांत हो जायेगा | कईयों को सर्दी हो जाती है तो दये नाक से स्वास लें, रोके सवा मिनट, डेढ़ मिनट फिर बाये से छोड़े | ऐसा ३-४ बार करें २ दिन सर्दी भाग जाएगी | सर्दी, खांसी की दवा लेने से कफ सुख जाता है | ट्यूमर बनता है, कैंसर बनता है | हार्ट अटक बनता है | ये अंग्रेजी दवा जहर से भी ज्यादा नुकसान करती है | जहर तो एक बार मारता है, ये तो बार-बार मारता है | खली पेट | 
होली के रंगों की सत्यता
अभी होली आएगी तो लोग होली क दिनों में रंगो से खेलते हैं | ये होली में रंग खेलने की परम्परा हमारी भारतीय संस्कृति की है | लेकिन इसलिए बनाई थी के होप्ली के दिनों में सूर्य थोडा पृथ्वी के नजिक होने से हमारे शरीर पर गर्मी की असर पडती है | कफ पिघलता है, भूख कम हो जाती है | और स्वभाव चिडचिडा होता है | तो स्वभाव चिडचिडा, कफ और बीमारी को नियंत्रित करने वाला पलाश के रंग से होली खेलते थे | अथवा तो दुसरे प्राकृतिक रंगो से | अंग्रेजी शासन के कारण हम पलाश के फुल भूल गये | गेंदे के फुल अथवा महेंदी से, हल्दी रंग बनते है | २०१० की ऋषि प्रसाद पुस्तक में कौन सा रंग कैसे बनता है | जैसे आवले के पावडर को लोहे के बर्तन में भिगोने से काला रंग बनता है | लेकिन केमिकलसे बना काला रंग लेड ऑक्साइड पड़ता है | जो किडनी को खराब करता है | महेंदी से हर रंग तो फायदा करता है लेकिन अंग्रेजी रंग में कॉपर सल्फेट पड़ता है जो आँखों में जलन,. सुजन और अस्थाई दृष्टि कमजोर कर देता है | सिल्वर रंग में एल्युमीनियम ब्रोमाईट पड़ता है जो कैंसर पैदा करता है | अब करोड़ो रूपये के तो हम रंग खरीदे, और अरबो रुपया हम बीमारी के लिए दे | गुलाम बना दिया अंग्रेजो ने | मैंने विरोध नही किया | मैंने पलाश के फूलो से होली खेलना चालू करा | और इन रंगो की पोल प्रजा को सुनाया | नीला रंग प्रेशियन ब्लू पड़ता है जो चरम रोग देता है, खुजली आदि देता है | और लाल रंग में मरक्यूरिक सल्फेट पड़ता है जो त्वचा को कैंसर देता है | और जो बैंगनी रंग मिलता है बजार में उसमें क्रोमियम आयोदाईट पड़ता है जो दमे की बीमारी और एलर्जी देता है | कोई भी रंग निर्दोष नही है तो आप ध्यान रखना होली के दिनों में इन रंगो से खेल कर दुसरो को बीमारी नहीं देना और अपने पैसे को तबाह मत करना | होली खेलना है तो पलाश के फूलो से | पलाश के फुल रत को भीगा दिया सुभ उससे खेले | वर्ष भर रोग-प्रतिकारक शक्ति रक्षा करेगी | होली के १५-२० बाद नमक बिना का भोजन करो | कई बीमारियाँ भाग जाएँगी | नीम के पत्ते १५-२०-२५ कोमल १ काली मिर्च चबाके पानी पियो | जठरा और ये सब ठीक रहेगा | 
अब माघ मॉस में शट-तिला एकादशी आएगी | उसमें स्नान, तील मिला उपटन, तिल मिला भोजन, तील का दान, तील का होम, आदि तील का प्रयोग करने से पूण्यदाई शट-तिला एकादशी हो सकती है | १२ फरवरी को  विष्णु पदी संक्रांति है, , उसमें पुण्यकाल दोपहर को १२:५३ से लेकर सूर्यास्त तक १०,००० गुना फल होगा जप का | १७ फरवरी रविवार की सप्तमी है | लाख गुना फल देगी | सुभ सूर्य उदय से लेकर १२:४८ मिनट तक | आरोग्य का मन्त्र जपोगे तो नोरोग रहोगे | स्वास भरो, रोको, जपो नासे रोग हरे सब पीर, जपत निरंतर हनुमत बीरा || ऐसा सवा मिनट, डेढ़ मिनट स्वास रोक के जपो | फिर छोड़ दो | ऐसा २-५ बार करो फिर १-२ बार स्वास बाहर रख के जपो | फिर छोड़ दो | मन्त्र सिद्धि होगी और रोग जल्दी आएगा नहीं | अथवा दूसरा मन्त्र भी है आरोग्य के | तो आरोग्य का मन्त्र जपोगे तो वो भी निरोगता की सिद्धि और किसी को भी दोगे तो वो भी निरोग हो जायेगा | भूलकर भी रविवार की सप्तमी को संसारी व्यवहार ना हो और भूलकर भी झूट, कपट, बेईमानी मतलब पाप ना हो | जितना पुण्य हो जाये उसका लाख गुना होगा | फिर १८ फरवरी भीष्म पितामह का श्राद्ध, तर्पण दिवस है | जिसको सन्तान नही होती तर्पण दें | २१ फरवरी जय एकादशी | ब्रह्म हत्या जैसे बड़े-बड़े पाप भी नाश होते हैं | और पिशाचत्व की प्राप्ति नही होती | वो आदमी पिशाच नही बन सकता | नही तो मुसोलीन पिशाच बन गया | अब्राहम लिंकन बनके व्हाईट हॉउस में भटकता है | २२ फरवरी तील द्वादशी है | २२ फरवरी को स्नान, दान, होम, भोजन में मतलब फलाहार में तील हो | ब्रह्मपुराण में लिखा है | वो व्याधियों से रक्षा करेगा | 
ॐ कार कंठ से १० बार | २२,००० श्लोक हैं ॐ कार जप की महिमा के | दीक्षा लेने से गुरु-शिष्य के आत्मा एकाकार हो जाती है | तो फिर दुरी दुरी नही रहती | भगवान ने भी ॐ कार मन्त्र की खोज की है | खोज उसी की होती है जो पहले था | निर्माण उसी का होता है जो पहले नही था | ॐ कार मन्त्र और बिज मन्त्र श्रृष्टि के मूल से थे | भगवान ने तो ब्रह्माजी को पैदा किया | उसके पहले ॐ कार मन्त्र था | इसलिए तमाम मन्त्र में ॐ कार की साधना है | 
 
 
 
 
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