मंत्र जाप से बारिश

 

P.P. Sant Shri Asharamji Bapu Satsang – Badarpur-Delhi, 23rd June 2013 Part-II

    ये सातारा जिले में अकालग्रस्त लोगों के मटके, बादलियाँ, पीने के साधन वो.. बापू जी ने पानी का बिघाड किया वो दिखाने के लिए प्रोग्राम तो मुंबई में हुआ, लेकिन दिखाया सातारा जिले का जहाँ अकाल था |  तो हमारे साधक वहाँ पहुँच गये | जहाँ सुखाग्रस्त था, पिछले दो वर्ष से त्राही माम् पुकार रहे थे लोग | पीने के पानी नहीं, गाए-भैसों की भी तकलीफ थी | तो २२ से २४ मई २०१३ को अपने साधकों, समिति वालों ने यज्ञ शुरू किया | तो यज्ञ के पहिले से ही तलाव में दरारे पड़ी थी और यज्ञ शुरू हुआ कुछ एकाद दिन में आकाश में बादल पधारे और यज्ञ पहिला हो उसके पहिले छोटे-मोटे नाले पुरे हो गये और तलाव इतना पानी आ गया की १/३ तलाव भर गया | जहा सुखा की तकलीफ थी | लेकिन वो साधकों ने अपने मन से ही ‘ॐ नम शिवाय, ॐ नम शिवाय’ करके आहुतियाँ दी | अगर बीजमंत्र और थोड़ी विधि यहाँ से भी लेते तो तलाव ओव्हरफ्लो भी हो सकता था | तो ये सब भगवान की मंत्र की अदभुत शक्तियाँ साधकों के द्वारा कई बार अपना प्रभाव दिखा देती है | 

एक जगह पर आये दिन बहुत एक्सिडेंट होते थे | वो जगह थी वापी की | देखते – देखते लोग गाडी को जरा एक दुसरे को टच हुआ और अंदर बैठा हुआ आदमी मर जाय | तो मैं समझ गया की यहाँ प्रेतों का बाहुल्य है | तो वापी वालों को मैंने कहा कि तुमने जो मंत्र लिया है, गुरुमंत्र का जप करो| फिर रविवार के दिन जहाँ एक्सिडेंट होते है वहाँ गुरुमंत्र जप करना १० मालाएँ | फिर प्रेतों की मुक्ति का मंत्र मैंने उनको गोपनीय में दिया | वो जप करते जाना मन में और स्वाहा करते जाना और फिर एक माला सबकी हो जायेगी| फिर वो पानी में देख के आसपास में छिटक देना | आये दिन रोज लोग मरते थे.. वहाँ बलि चढती थी एक्सिडेंट के द्वारा | छ: महीने में खबर आयी के वहाँ पर एक भी एक्सिडेंट नहीं | १२ महीने में खबर आयी के अभी तक नहीं | दो साल के बाद हम गये तो बोले- बाबा! एक भी एक्सिडेंट जीव लेवा नहीं हुआ | खाली किसी  ड्राईवर को नशे से कारण जरा-सा पुलियां की खरोच आई थोड़ी गाड़ी को| दो साल में कोई एक्सिडेंट नहीं हुआ, थाने में जाँच कर सकते है | नहीं तो एक महीने में कई जाने जाती थी | तो जहाँ-जहाँ एक्सिडेंट होते है | रात्री का ९ से ११ के बीच नींद शरीर की थकान मिटाने में बेजोड़ काम करती है और ११ से १ की नींद शरीर में नई कोशिकाये बनती है और यौवन लाती है और १ से ३ तक की नींद लिवर को मजबूत करती है और जिसका लिवर मजबूत हो तो सारा शरीर मजूबत हो | १ से ३ के बीच कोई जगते है तो उनको अनिद्रा की तकलीफ सहनी पडती है, नेत्रज्योति की तकलीफ सहनी पडती है और प्रतिक्रिया करने की शक्ति ढब्बू हो जाती है | बौद्धिक प्रतिक्रिया, मानसिक प्रतिक्रिया, इसका नमूना देखना हो तो ट्रक ड्राईवर को देखना रात्री को देखते हो तो प्रतिक्रिया शक्ति उनकी ढब्बू है | ट्रक मालिक तो ट्रक का आर टी ओ टैक्स भरते है, ट्रक ड्राईवर टोल टैक्स भरते है फिर भी दो-चार खाकी वर्दी वाले डजनों-सैकड़ो ट्रक को रोक देते है और नाक रगडवा-रगड़वा उनसे पैसे नोचते है और आज तक कोई प्रतिक्रिया नहीं.. नोचते चले जाते है | और ट्रक ड्राईवर का कोई बढ़िया फ्लैट हो तो मुझे दिखा दे | नहीं दिखा सकते | बढियाँ गाडी नही होगी, बढ़िया फ्लैट नहीं होगा | मेहनत तो तुम्हारे- हमारे से वो ज्यादा करते है | लेकिन रात्रियों को जागरण के कारण उनके बौद्धिक, मानसिक और शारीरिक प्रतिक्रिया ढब्बू हो जाती है | इससे सबक सीखना है कि रात को ११ से ३ के बीच गहरी नींद करना ही चाहिये | १० बजे करे तो और अच्छा है | जब से ये मैंने शास्त्रीय बात सुना तब से मैंने शाम को ७ बजे तक भोजन कर लेता हूँ, सुबह १०-११ बजे तक कर लेता हूँ | मेरे साधकों को भी बड़ा फायदा हुआ है | 

जो १ से ३ के बजे भोजन करते है उनको भोजन है सही पचता नहीं है | शरीर थका-थका रहता है | जो रात को देर से भोजन करते है वो मोटे भी हो जाते है और बिमारियों को शिकार हो जाते है | सूरज अस्त के पहीले भोजन कर ले तो और अच्छा है | नहीं तो ७ बजे ८ बजे कर ले जो देर हुआ तो खाना खराब हो जाता है | दोपहर को ११ के बाद जितना देर से भोजन करेंगे क्योंकि ११ से १ तक हमारी जीवनीशक्ति ह्रदय में होती है | ह्रदय को विकसित करने का समय, ९ से ११ भोजन पचाने का समय होता है जीवनीशक्ति को | तो जिस समय जीवनीशक्ति जहाँ है उस समय वो कार्य शरीर के लिए, मन के लिए, बुद्धि के लिए हितकारी है | जैसे जिस समय अधिकारी का अधिकार है पर वो बदली हो गया तो कोई अधिकार नहीं ऐसा ही हमारी जीवनीशक्ति २४ घंटो में १२ जगह पर यात्रा करती है | ३ से ५ के बीच फेफड़ों में जीवनीशक्ति होती है | तो ४ से ५ के बीच प्राणायम कर लेता हूँ मैं प्राणबल बढ़ता है, मनोबल बढ़ता है | ५ से ७ बडी आंत में जीवनीशक्ति होती है | तो कसरत कर लेना चाहिये, पानी पीना चाहिये, शौच आदि से, स्नान आदि से निवृत्त होना चाहिये ७ बजे के पहिले-पहिले | ७ से ९ के बीच जीवनीशक्ति आमाशय में रहती है | कुछ पेय पदार्थ पीना है तो उस समय अच्छा पचेगा | ९ से ११ जीवनीशक्ति अग्नाशय में रहती है | ९ से ११ के बीच में भोजन करना चाहिये | ११ से १ जीवनीशक्ति ह्रदय में रहती है | ह्रदय को विकसित करने के लिए – पाठ, जप, ध्यान, शुभकर्म, भगवतभाव | १ से ३ जीवनीशक्ति रहती है छोटी आंत में, जो ११ बजे भोजन किया है १ से ३ बीच उसके रस को छोटी आंत खींचकर पुरे शरीर को देती है | अगर १ से ३ के बीच भोजन किया तो उसके कार्य में विघ्न डाला और कच्चा रस खीचेगी तो मिलेगा वही | कच्चा, पक्का रस जैसे डाल उबली है और पक गई है और फिर दूसरी डाल दी वो थोड़ी बनी न बनी तीसरी कच्ची डाल दी तो दाल का स्वाद और हाल व आरोग्य गड़बड़ हो जायेगा | ऐसे ही जीवनीशक्ति १ से ३ बीच छोटी आंत में होती है और उस समय भोजन करना नुकसान करता है | ३ से ५ जीवनीशक्ति मूत्राशय में होती है | खूब पानी पीना चाहिये ३ से ५ के बीच में, पानी पी के तुरंत पेशाब नहीं करना चाहिये | पेशाब के बाद तुरंत पानी न पीये ५ – २५ मिनट का फांसला हो | और ५ बजे तक पेशाब आदि करके पानी खाली कर दे | तो मूत्र सबंधी बीमारियाँ बुढ़ापे में नहीं होगी | 

अगर किसी को भी पथरी सबंधी बीमारी है तो पथरी का ऑपरेशन भूल कर भी न कराना | आपने आश्रमों में और समिति वालों के पास पथरीचट पौधा है | पथरीचट पौधा बढ़ा पन्ना है तो एक चबाओ, मध्यम है तो दो पत्ते चबावे | कुछ दिन चबाने से पथरी के टुकड़े-टुकड़े हो के निकल जाती है | 

ऐसे बायपास सर्जरी भी कभी नहीं कराना | अपने आश्रम के वैद्य घरेलु उपाय बतायेंगे उससे भी ब्लोकेज खुल जाता है अथवा तो आश्रम की ह्र्द्यसुधा नाम की औषध लिक्विड है २ – २ चम्मच रोज लेवे तो ब्लोकेज खुल जाता है | बायपास सर्जरी नहीं कराना चाहिये | 

अपेंडिक्स का ऑपरेशन नहीं कराना चाहिये | २ – २ गोली कोष्टशुद्धि पेट की शुद्धिवाली २ – २ गोली शाम को लेवे| कैसे भी पेट सबंधी तकलिब है तो ठीक हो जाती है, अपेंडिक्स ठीक हो जाता है | 

बच्चे को जन्म देते समय डॉक्टर डरा देते सिजेरियन कराते है और बड़ा ऑपरेशन कराते और वो भूल के भी नहीं कराना चाहिये | देशी गाय के गोबर का १० ग्राम रस दे दो भगवान नाम लेके.. अपने-आप प्रसूति होती है | बच्चा गर्भ में टेढ़ा है, ये है, दो सिरवाला है, आँखे नहीं है, किडनी नहीं है… ये सब डरा-डरा के पैसे लुटनेवाले गुमराह कराते है उनके बांतो में नहीं आना चाहिये | दो सिर वाला बच्चा है ओबर्शन करावो | मैंने कहा मत करावो| फिर दो बच्चे लेके आये बोले- बापू ! अपने दो सिर वाले बच्चे से दो बच्चे बना दिये | ये मैं जानता भी नहीं, कर भी नहीं सकता | वो तो दो ही बच्चे थे ओबर्शन के लिए, पैसे कमाने के लिए तुम्हारे साथ धोखा कर दिया जाता है | तो माताएँ-देवियाँ भूलकर भी ऐसे डॉक्टरों के चक्कर में नहीं आना जो बोले तुम्हारा गर्भ विकसित नहीं हो रहा है | आँखे नहीं है, किडनी नहीं है, दो सिरवाला है और भी कुछ कह दे तो उसके चक्कर में नहीं आना | 

गर्भ का विकास करना हो तो – नारियल और मिश्री चबा-चबाकर खाओ | दूध पीते हो तो ४०० ग्राम उसमे २०० ग्राम पानी डालो, सोना हो चाँदी हो डाल दो | उबाल – उबाल के पानी पानी सुख जाय और दूध गर्भिणी पिये तो बच्चे की ग्रोथ होगी और मजबूत बनेगा | बुढा बुजर्ग, कमजोर आदमी ऐसा दूध पीयेगा तो बलवान हो जायेगा | 

एक प्रसिद्ध व्यक्ति था | उसकी सेक्रेटरी बीमार पड गई| ऐसी पागल जैसी हो गई | माइग्रेन की बीमारी और मोबाईल फोन के उपयोग से वो युवक कन्या अच्छी बिचारी, संयमी ऐसा नहीं कोई बॉयफ्रेंडवाली हो | नहीं, संयमी और किसी संत की वो सेक्रेटरी थी | वो संत को पिता मानती थी | लेकिन ऐसी बीमार हुई की कुछ के कुछ होने लगा कि संत महाराज को बोलती तुम मेरे को मारते हो.. ऐसा मेरे को लगता है स्वप्ने में | तुम मेरे को जला रहे हो, ऐसा हो रहा है, नींद नहीं आती | तो एक ८४ साल के संत ने उस कन्या को उपाय बताया | और उस उपाय से वो चंगी हो गई | माइग्रेन चला गया | वो उपाय मैं तुमको बता देता हूँ |    

माइग्रेन हो तो – ककड़ी के बीज, खीरे के बीज, तरबूज के बीज और लौकी के बीज चार बीज हो गये | सात ममरी बदाम और सात पिस्ते लें (डोडी पिस्ता नहीं बारीक पतले पिस्ते आते है) | ये भीगा दो और सुबह उसको घोट के अच्छी तरह से और लो | २ – ३ दिन में वो कन्या चंगी हो गई | १५ दिन तक लेना चाहिये | तो मेरे को लगा ये प्रयोग अच्छा है तो मैंने कर लिया | तो मेरे को अंतर प्रेरणा हो गई  – सात ममरी बदाम, सात पिस्ते, चार प्रकार के बीज ये महँगा सौदा है| ये इस सीजन में खायेगा तो भूख क्या लगेगी | फिर अजीर्ण की तकलीफ होगी तो मेरे को याद आ गया – ममरी बदाम, गाय का घी (अपनी देशी गाय) जिस गाय को आँवला खिलता हूँ मैं, तुलसी खिलाते है और चीज खिलाते है | ऐसी गायों का घी, ममरी बदाम और मिश्री उसको पीस-पास के चाँदी के बर्तनों में रखते चंद्रमा की चाँदनी में और फिर उसको पैक करके चाँदी के बर्तन में अथवा तो मार्बल के बर्तन में उसको अनाज में दबोज देते ७ दिन तक | तो वो बन जाता है ममरी बदाम महाशक्तिशाली औषध | ये सात बदाम नहीं होते एक – डेड बदाम ही हुआ | उस ८ -१० ग्राम मिश्रण को चबा-चबाकर खाये तो माइग्रेन तो भाग जायेगा, पूरा नाड़ीतंत्र चंगा हो जायेगा | और मैंने वो खाया था और नेत्रबिंदु डाला था की मेरा नाड़ीतंत्र इतना पावरफुल हो गया की मेरा चश्मा उतर गया | वो मैंने सौ-सौ किलो ममरी बदाम का आदेश दे दिया | कल २४ जून है चंद्रमा १७ हजार किलोमीटर धरती के करीब आयेंगे | अगर बादल नहीं हुये तो ममरी बदाम को चंद्रमा की चाँदनी भी खिलायेंगे | और ७ दिन में वो महा टॉनिक बन जायेगा | 

सैंधा नमक खाये तो भूख लगेगी और भूख लगी और खाया.. भारी हो रहा है तो सौंफ और इलायची चबाके खावोगे तो पाचन ठीक हो जायेगा | 

जामुन खाली पेट नहीं खाना | उनके की भी बड़े फायदे है | भूख लगाते है, लेकिन भूखे व्यक्ति खायेगा तो वायु करेंगे | खाकर फिर जामुन खाना |  नारायण हरि …..

जिनको हार्ट अटैक का कोई भी शक हो वो लोग वैद्य से मिलकर वो फालसे का रस ले जाना | काम में, क्रोध में, भय में, चिंता में, ममता में जो दिल गिर रहा है वो भी बदल जाता है | 

और जिनको गरमी के कारण, पित्त के कारण और किसी कारण रात्री के १२ बजे नींद खुल जाती है तोअथवा नींद गाढ़ी नहीं आती तो उन लोगों को क्या करना चाहिये कि ५० ग्राम धनियाँ, ५० ग्राम सौंफ, ५० ग्राम आँवला नहीं तो पावडर और ५० ग्राम मिश्री | उसका मिश्रण बनाके रख दे | ९ से ११ भोजन कर ले फिर ३ से ५ के बीच ये भीगा हुआ घोल मसल के पी ले | गरमी भाग जायेगी अच्छी नींद आ जायेगी | नथेली फूटती है तो – धनियाँ का रस नाक में २ – २ बूंद डाल दो | नथेली फूटना बंद हो जायेगी | 

ॐ ॐ ॐ                                               

 

ॐ शांति

श्री सदगुरुदेवजी भगवान की महा जयजयकार हो !

गलतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे ….  

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