Archive for the ‘Experience’ category

चेतना के स्वर ( भाग-३ )

अप्रैल 11, 2007

चेतना के स्वर ( भाग-३ )

Courtesy:www.hariomgroup.org

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जीवन में सफ़लता (अनुभव)

सितम्बर 30, 2006

मैने तथा मेरी धर्मपत्नी ने २३ जनवरी २००२ को गोंदिया (महा.) में पूज्य सदगुरुदेव से मंत्रदीक्षा ली।

दीक्षा लेने के पूर्व मेरे स्वभाव एवं व्यवहार में चिडचिड़ापन था एवं मानसिक रूप से भी मैं काफी तनाव में रहता था, परंतु दीक्षा लेने के उपरान्त नियम का पालन करते हुए जप करने से मुझे जो शान्ति, प्रसन्नता, सूझबूझ व सफ़लता मिलती हए, उसका मैं बयान नहीं कर सकता। मेरे काफी अवगुण दूर हो गये हैं। जब भी मुझे कोई परशानी महसूस होती है तो मैं अपने गुरुमन्त्र का स्मरण करके रात्री में सो जाता हूँ, उस रात स्वप्न में पूज्य गुरुदेव अवश्य ही दर्शन देते हैं। वही मुस्कुराता, शांत-सौंम्य चेहरा नजर आता है और मेरी परेशानी का भी निदान हो जाता है।

मेरी धर्मपत्नी के व्यवहार में भी काफी परिवर्तन आया है।’सदगुरुदेव का आशीर्वाद सदा हमारे साथ है’ यही सोचकर हम रोज अपनी प्रतिदिन की दिनचर्या प्रारंभ करते हैं, जिससे हमें अपने कार्यों में सफ़लता एवं संतोष भी मिलता है।

रविकर्ण सिहं
(जबलपुर)

संतान प्रप्ति (अनुभव)

सितम्बर 30, 2006

सितम्बर १९९८ में पूज्य बापूजी के हिसार सत्संग कार्यक्रम में हम दोनों पति-पत्नी ने मंत्र दीक्षा ली थी।

उस समय हमारी कोई संतान नही थी, जबकि हमारी शादी को १४ वर्ष हो चुके थे। परन्तु पूज्य बापूजी की ऐसी कृपा हुई कि एक वर्ष बाद हमें गुरुपूर्णिमा पर्व के दिन पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई जिस का नाम हमने गुरुप्रीतिशरण रखा है।

पूज्य बापूजी की इस बालक पर इतनी कृपा है कि जहाँ कहीं भी टी. वी. पर बापूजी का सत्संग चल रहा होता है, यह वहीं खडे होकर सुनने लगता है। यह बालक हमें १४ वर्ष बाद प्राप्त हुआ है। मंत्र दीक्षा के पूर्व हम दोनों ने संतान प्राप्ति के लिये कहाँ- कहाँ की दवाइयाँ और ठोकरें नही खायी थीं।

महेश कुमार भारती
व्यास बाँध
तलवाडा टाउनशिप
पंजाब