Archive for the ‘Sant Asaram Bapu’ category

Tumhaare Pyaar ne Guruvar

जून 4, 2007


Tumhaare Pyaar ne Guruvar, Humko Tumse Joda Hai

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सबसे बड़ा आश्चर्य !!!

मई 1, 2007

कोई दैत्य या यमराज हाथ पकड्कर आपको नरक में नही ले जायेगा। अन्तकाल में आपके चित्त की जैसी अवस्था होगी, आप आगे उसी ढंग की यात्रा करन लगोगे। जैसे पाप-वासना जोर पकड़ती है तो व्यक्ति शराब में सुख मानता है, जुऐं में सुख मानता है, पान मसाले में सुख मानता है। चोरी, बेईमानी, परस्त्रीगमन आदि में सुख मानता है क्योकि मति मर गई है।

अगर पुण्य जोर मारता है तो अपनी पत्नी होते हुए भी संयम से रहेगा। जप, ध्यान, सेवा, सुमिरन, दान, पुन्य करेगा। अपने ही पुन्य और पुन्य बढ़ाने की सद्‌बुद्धि देते है तथा अपने ही पाप और पाप बढ़ाने की दुर्बुद्धि देते है, मनुष्य स्वतन्त्र इसलिये है कि वह विवेक का आश्रय ले सकता है। भगवान को अपना और अपने को भगवान का मानकर उनके नाम का जप “ॐ ॐ श्री परमात्मने नमः, हरये नम करके अपना विवेक और जगायें तथा विवेक का आश्रय ले कर अशुभ से बचे। दृढ निश्चय होकर भगवान की तरफ़ लग जाये तो राग-द्वेष ढीलें हो जायेगें।

पुण्य उदय हुआ और पाप क्षीण हुआ इसकी पहचान क्या है ? ईश्वर की तरफ़ चलने का दृढ़ निश्चय हो गया तो समझ लो कि पुन्य उदय हो गया।

काया कच्ची (मिटने वाली) है, धन कच्चा है, मन चंचल है फ़िर भी आदमी अचल रहने के लिय प्रयत्न कर रहा है। काल उसका मखोल उड़ाता है कि मरने वाले शरीर और चंचल मन वाला मनुष्य स्थिर रहने की कैसी बेवकूफ़ी कर रहा है।

यक्ष ने धर्मराज युधिष्ठर को सवाल पूछा :”इस पृथ्वी पर सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है? ऐसा कौन सा आश्चर्य है जो सबको भुलावे में डालता है?”

तो युधिष्ठर ने कहा:
“संसार से रोज-रोज प्राणी यमलोक में जा रहे है, किन्तु जो बचे हुए है, वह सर्वदा जीते रहने की इच्छा करते है। इससे बढ़कर आश्चर्य और क्या होगा।”

निरोगी व श्री सम्पन्न होने के लिये

अप्रैल 13, 2007

ॐ हुं विष्णवे नमः

निरोगी व श्री सम्पन्न होने के लिये

इस मन्त्र की एक माला रोज जप करें,

तो

आरोग्यता और सम्पदा

आती हैं ।

( गुरुपूनम अमदावाद २००५ के बापूजी के सत्संग से )

चेतना के स्वर ( भाग-१ )*

अप्रैल 11, 2007

चेतना के स्वर ( भाग-१ )
*Courtesy:www.hariomgroup.org

होली २००७ !!!

मार्च 12, 2007

Holi Videos 2007

होली २००७ के विडिओ के लिये यहा पधारिये !

गुरू की सेवा साधु जाने !!

मार्च 8, 2007

|| श्री गुरू स्त्रोत्रम ||

मार्च 8, 2007