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महापुरुषों की नजरों से……

फ़रवरी 5, 2013
30th Jan. 2013  
Jabalpur
Part 2 
 
धर्मदास की कथा 

भगवान का दर्शन एक बार हो जाये तो फिर अदर्शन हो नही सकता | एक बार भगवान का ज्ञान हो जाये तो अज्ञान नही होता | एक बार गुलाब के फूलो का ज्ञान हो जाये मैं छुपा दूँ तो उसका अज्ञान नही होता | गुलाब को जान लिया | ऐसे ही भगवान का दर्शन हो जाये तो भगवान को जान लिया | रोज-रोज भगवान का दर्शन करना पड़ता है इसका मतलब तुमने मूर्ति का दर्शन किया | अभी भगवान का दर्शन नही हुआ | कबीरजी ने ऐसी सार बात सुनाकर उसकी आँखों में झाँका | वो तो सत्पात्र था | क्या का क्या होने लगा | आज तक तो मैं मूर्ति का दर्शन करता था | भगवान का दर्शन एक बार होता है तो दूसरा उसको पर्दा कौन डाल सकता है | अज्ञान नही होता | कबीरजी जाते-जाते बोल गये अच्छा मेरा नाम कबीर है, कभी काशी आओ तो मिल लेना | धर्मदास सोचता था के मैं अभी पीछा करूं | लेकिन रेवा डिस्ट्रिक्ट में इतने खेत-खली हैं | इतनी दुकाने हैं, इतने ब्याज पे पैसे हैं | इतने गहने हैं, हीरे हैं, जवाहरात हैं | अभी इनके पीछे | समझा के अपने को ले आया तो बाकें-बिहारी के दर्शन नही कर पाया | घर में बाके-बिहारी की पूजा करे तो बोले अरे ये तो प्रभु की मूर्ति है, प्रभु आप कौन हो ? अंदर से आवाज आया संत शरण जाओ | कैसे करूं ? बोले करने वाला तो अहम होता है | अहम, बुद्धि, मन बदलता है | फिर भी जो नही बदलता है वो मैं हूँ | मुझे जानो | आपको कैसे जणू, कैसे पाऊ ? जाओ संत शरण | ऐसी आवाज आये | ६ महीने हुए ना हुए कबीरजी के पास पहुँच गए | और यू देखे मेरे आनंद स्वरूप, ज्ञान के दाता, सिद्ध पुरुष कबीर को | कबीर को ऐसे देखे मानो पी जायेगा कबीर को | इतने प्यार से देखे | 

कुछ लोग ऐसे बेवकूफ होते हैं महाराज आशीर्वाद दो | अरे बेवकूफ संत के दर्शन अभी आशीर्वाद तेरे गहरे में | नजरों से वो निहाल हो जाते हैं जो संतो की नजरों में आ जाते हैं | पहुंचे हुए संतो से आशीर्वाद माँगा थोड़े ही जाता है | चंदा को बोले चांदनी दे तो चांदनी का मजा क्या लेगा तू ? भिखमंगा होके | तू तो अभी चाँदनी देख के आन्दित हो जा | सूरज को बोले रोशनी दे तो अभी रोशनी का फायदा क्या लेगा ? गंगाजी को बोले पानी दे | अरे गंगाजी बोले मुर्ख है तू अभी मेरी ठंडक लेले तू | अभी पानी लेले | ऐसे ही जो सत पुरुष होते है, सिद्ध पुरुष होते हैं | उनको ऐसा नही बोलना चाहिए आशीर्वाद दो | जो बिजनेस मेंन होते हैं वो जुग-जुग जियो ज्यादा प्रसाद रखो तो ज्यादा अच्छा आशीर्वाद | न रखो तो थोडा आशीर्वाद और जुग-जुग जियो को तो मर जायेगा | जुग-जुग जियो कैसे जियेगा ? खुदा-ताला रोजी में बरकत दे | खुद तो ब्याज पे चल रहा है | १० साल से गूगल का धुप करते हैं और दुकान से २-३ टके पर ब्याज ले रहा है | अरे वो ईश्वर में, अल्लाह में बैठा है, बोले ना बोले उसकी निगाहों से ही दुआ बरस जाती है | नजरों से वो निहाल हो जाते हैं जो संतो की नजरों में आ जाते हैं | 
टुंक-टुंक कहे निहारो धर्मदास बहुत दिन बाद आये | हर्षित मन की ना बह्गपुरुष मोहे दर्शन दीन्हा | मन अपने तब कीन्ह विचारा इनकर जाना महा टंक सारा | मन में विचार किया के कबीरजी के पास तो महा टंक सार हैं | मर्रे रुपय, पैसे, तो कुछ भी नही | सत्य की  अशर्फी, आनंद की गिनियाँ, तिजोरी भर रही भरपूर | इतना कह मन कीन्ह विचारा | तब कबीर ओर निहारा | आओ धर्मदास पग धरो | कुहुक-कुहुक तुम काहे निहारो धर्मदास हम तुमको चिन्हा | बहुत दिन में तुम दर्शन दीन्हा | तुमको मैंने वृन्दावन में देखा के तुम सत्पात्र हो | गुरु की कृपा को पचाने वाली श्रद्धा, भक्ति के धनी  हो | इसलिए मैंने तेरे को देखा था | देख कैसे आ गया | अब क्या है | गुरूजी अब मैं यहीं रहूँगा | धर्मदास की इतनी जायदाद ये वो था | अपने रिश्तेदारों को लिख दिया जो है आपस में बाँट लेना यहाँ महा टंकसाल है | उसको छोड़कर तुम्हारे नश्वर सोना बाँटने नही आऊँगा | गए नही वापस | अमीरी की तो ऐसी की सब जर लुटा बैठे | ओर गुरुभक्ति की तो ऐसी की के गुरु के दर आ बैठे | फिर वापस गए नही | बड़े धनी थे, बड़े बुद्धिमान थे | फिर कबीरजी ने भी लुटा दिया उनको आत्म परमात्मा का ज्ञान देकर | 
मैं किसी को ये नही कहता तू दारू छोड़ दे, गुंडा-गर्दी छोड़ दे, चम्बल की घाटी छोड़ दे | तू अभिमान छोड़ दे | कुछ भी नही बोलता | मैं तो अच्छाई पकड़ा देता हूँ | अंग्रेजी रंग छोड़ दो नही | पलाश के रंग से रंग दो | वेलेंटाइन डे मत मनाओ नही, माँ-बाप का पूजन दिवस मनाओ, वेलेंटाइन डे की ऐसी-तैसी | अब माँ-बाप का दिल भी खुश बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित, चमकता है | 
 
 
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दीक्षा की महिमा

फ़रवरी 5, 2013

30th Jan. 2013

Jabalpur
 
जरा-जरा बात में माताए, बहेने बेचारी ऐसे ठगी जाती हैं, डरा देते हैं | बोले गर्भ का विकास नही है, बच्चे की आँख नही है, किडनी ठीक नही है, दिमाग नही है | बस गर्भ-पात कराओ अथवा तो बच्चा ही नही है, गांठ है | मैंने कहा गांठ-वाँठ नही है, तुम देखो क्या होता है | फिर कहते हैं बापूजी आपने बच्चा बना दिया | मैंने नही बनाया वो तो था ही, मैं काहे का बनाया | डॉक्टरों ने बोला लड़की है, बापू स्वप्ने में आये बोले गर्भ-पात नही कराना | बापूजी उस लड़की को आपने लड़का बना दिया | मैंने नही बनाया वो तो लड़का ही था | मैं काहे को झूठा यश उठा लूँ | ऐसा कुछ नही होता वो था ही लड़का बता देता है लड़की ताकि गर्भ-पात के पैसे कमाओ | अच्छे डॉक्टरों को तो मैं खूब हृदय से लगता हूँ | बाकि जो गुमराह करती है उनको थोडा चेतावनी दे देता हूँ | माईयों के साथ अत्याचार ना हो | ऐसी-ऐसी माइयाँ हैं जिनको देख कर दया आ जाये | बिन जरूरी सिजेरियन कर दें | बेटियों की परेशानी देखकर तो बाप को तो दुःख होगा | मैं तो पिताजी हूँ | जो तो ठगते हैं उनको हरामी बोल दिया तो क्या है | महिलओं को ठगते हैं, बच्चों की हत्या करते हैं | और पिता वैसे ही अपने बच्चों को छोरा तू तो हरामी है | 
अब्राहम लिंकन, प्रेसिडेंट ऑफ अमेरिका, मानवतावादी था | लेकिन ईश्वर से जोड़ने वाली सत्ता के आभाव में अभी बिचारा व्हाइट हॉउस में कभी-कभी प्रेत के रूप में दिखाई देता है | वहाँ के समाचार पत्रों के आधार पर | ऐसे ही राजा अज साँप की योनी में भटका | राजा मृग किरकिट बन गया | श्री कृष्ण ने उसकी सद्गति की | बड़ा प्रसिद्ध राजा था | बुद्धिमान था तभी इतना प्रसिद्ध हुआ | लेकिन दीक्षा के बिना मरा तो किरकिट की योनी में जा गिरा | राजा भरत जिसके नाम से भारत नाम पड़ा, अजनाबखंड का, वो हिरन की योनी में चला गया | इसलिए दीक्षा बहुत जरूरी है | भगवान राम ने भी दीक्षा ली थी वशिष्टजी से | भगवान कृष्ण के भी गुरु थे | निगुरे आदमी का तो सब व्यर्थ है | जिसने दीक्षा लिया और माला पे जप करता है, वो माला गले में पड़ी है और कुछ भी दान-पुण्य करता है, तो उसका १००० गुना फल होता है | स्नान करता है, जप करता है, ध्यान करता है, माला गले में है | शौचालय में माला गले में पहन कर नही जाना चाहिए | अगर माला गले में है तो माला सहित स्नान कर लें | फिर माला धो के पहन लें | 
मासिक दिनों में माला गले में नही हो ५ दिन | मासिक दिनों में मंत्र जपे लेकिन ओमकार नही जपे | जैसे हरी ओम है तो हरी | ओम नमह शिवाय मंत्र है तो शिव | ओम गुरु मंत्र है तो गुरु | ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र है तो वासुदेव | ओम ऐम नमह मंत्र है तो कभी-कभी ऐम नही तो खली नमह ओम नही जपना है | 
मेरे शिष्यों को हार्ट-अटेक कभी ना हो, हाई बी.पी., लो बी.पी. कभी ना हो | अगर है तो आशीर्वाद मंत्र जप करो, भाग जायेगा हार्ट-अटेक, हाई बी.पी., लो बी.पी. | पति-पत्नी के झगड़े कभी ना हों | अगर झगड़े हैं तो १० माला जप करोगे थोड़े दिन तो झगड़े भाग जायेंगे | शनि देवता का ग्रह मेरे शिष्यों को नही होना चाहिए | अगर है तो १०० माला जप करो | शनि देवता आशीर्वाद देके, चाहे साढ़े सात साल के हों चाहे १२ साल के आये हों चले जायेंगे | मेरे शिष्यों को पीलिया ना हो, लीवर खराब ना हो | अगर है तो १ चुटकी चावल रखो, १ घूँट पानी रखो | और वो आशीर्वाद मंत्र ५० माला जप करो |१-२ दिन में पीलिया ठीक हो जायेगा, लीवर ठीक हो जायेगा | २६ लाख रुपया लेते हैं फिर भी लीवर ठीक नही होता | यहाँ २६ पैसा भी खर्च नही होता | एक चुटकी १ दिन में, २ चुटकी २ दिन में बस | २६ लाख भी बच जायेंगे | कुटुम्बी की लीवर काट के डालते हैं, कुटुम्बी भी बच जायेंगे | और सक्सेस १००% | 
ऐसे ही दमे की दवाई भी नही है | फू-फा कराते-कराते लंगज खराब कराते | दमे की दवा हमारे वैद्यों के पास है | 
अपेंडिक्स हो, ऐड़ी का दर्द हो तो पेट की शुद्धि से ठीक हो जाता है | ऑपरेशन नही कराना कोष्ट शुद्धि से ठीक होता है | पेट की खराबियों से विजातीय द्रव्य इकठे होते है तो दर्द होता है | शुद्धि हो गयी, कचरा निकल गया तो बस साफ | 
जिनको सिर दर्द हो, मंजन करते समय, पेस्ट नही करना चाहिये | जिनको गर्मी में आँखे जलती हों तो उनको मिर्च और तली हुई चीजे कम कर देना चाहिये | और धनिया, सौंफ और मिश्री ५०-५०-५० ग्राम मिश्रण करके रख देना | शाम को ३-४ बजे भीगा दे | सूर्य अस्त होने के पहले उसको छान के पी ले | पित भाग जायेगा | अधिक मासिक, सिर दर्द उसमें आराम मिलेगा | और मंजन करते समय सिर दर्द वाले या कोई भी कटोरी में पानी लेकर, घूँट मुँह में ले लिया | फिर आँख डूबाई और आँख फट-फटाया | तो आँखों और दांतों के द्वारा गर्मी खिचके सिर दर्द में आराम मिलेगा | गाये के घी का नस्य लेने से दिमाग के दर्द सब गायब | लेकिन गाये का घी शुद्ध मिले तो | सिरका और दूधि का तेल भी डालने से अच्छा रहता है | जो बहेरे हैं वो कण में प्याज का थोडा रस डाल दे | 
दीक्षा की महिमा
कलयुग में जो छोडकर मरना है वो चाह रहे है, ऐसी बुद्धि हो गयी है | तेरी प्रीति दे दे, तेरा नाम दे दे, मैं तुझे पा लूँ, ऐसे ग्राहक नही मिलते भगवान को | जो दीक्षा लेते तो वो ग्राहक भगवान के हो जाते हैं | भगवान दयालु हैं देखते हैं मेरे सिवाय तो जीव का कल्याण तो होने वाला नही | चाहे कितना धन मिले | सोने की लंका मिल गयी, फिर भी रावण का कल्याण नही हुआ | शबरी भिलन को गुरु की दीक्षा मिल गयी, फिर तो शबरी भिलन का अकल्याण नही हुआ, महाकल्याण हो गया | मीरा को रहिदास गुरु की दीक्षा मिल गयी, कल्याण हो गया | सदना कसाई, धन्ना झाठ, समाज में बोले २ पैसे के आदमी लेकिन गुरु की दीक्षा से महान बन गये | देवताओ के भी गुरु होते हैं, भगवान के भी गुरु होते हैं | मनुष्यों के भी गुरु होते हैं | अध्यात्म गुरु के बिना मनुष्य जन्म व्यर्थ है | शास्त्र में तो यहाँ तक लिखा है जो निगुरा है उसके हाथ का जल और भोजन, विष्ठा और मूत्र तुल्य है | कबीरजी ने भी निगुरे लोगो को लानत दी है | निगुरे का नही कोई ठिकाना, चौरासी में आना-जाना, यम का बने महेमान | सुन लो चतुर सुजान निगुरा नही रहना || निगुरा होता हिय का अँधा, खूब करे संसार का धंधा | पड़े नर्क की खान || कहाँ राजा मृग और किरकिट हो गया | नर्क ही तो है | पड़े नर्क की खान || सुन लो चतुर सुजान निगुरा नही रहना || गुरु बिन माला क्या सटकावे, मनवा तो चाहू दिशा जाये || यम का बने महेमान | सुन लो चतुर सुजान निगुरा नही रहना || हिरा जैसा सुंदर काया, हरी भजन बिन जन्म गवाया | कैसे हो कल्याण | निगुरे नही रहना || सुन लो चतुर सुजान निगुरे नही रहना || 
आचार्य विनोभा की माँ की कथा
आचार्य विनोभा की माँ रघुनाई रात को सबको भोजन कराके भगवान के आगे प्रार्थना करती, जो कुछ हुआ तुम्हारी सत्ता से हुआ | गलती हो गयी तो माफ़ करना, मुझे अपनी भक्ति देना | हे देव, हे ईश्वर तुम्हारी भक्ति देना | तुम्हारी माया में ना फसूं | जो तुम्हारी शरण आता है, उसको तुम पार क्र देते हो | मैं तुम्हारी शरण हूँ, हे गोविन्द, हे गोपाल, हे अच्युत | हे अन्तर्यामी देव, माझा देवा | आँखों में से आंसू आते | विनोभा लिखते मेरी माँ के वो आंसू देखकर मैं बड़ा प्रभावित होता | फिर मेरी माँ सोते समय दही जमाने को, भगवान को बोलती हे मेरे भगवान मेरी दही अच्छी जमा देना | मैं छोटा था तो सुनता था | जब बड़ा हुआ तो माँ को एक दिन टोका मैंने | अब दही जमाने में भगवान को क्यों घसीटती हो ? दूध गर्म हुआ और फिर दही के लायक हुआ तो दही डाल दो तो दही जमता है | जामन डालने से, इसमें भगवान को क्यों घसीटती है के भगवान तुम दही जमा दो | तो माँ ने मेरे को सुनाया अरे विनिया, तुझे पता नहीं सब नियम भगवान की सत्ता से हैं | दूध में जामन डालो और दही बने ये भगवान ने ही किया है न | तो अभी मैं भगवान को याद करके करूंगी तो भगवान के भाव से वो दही जायेगा तो अच्छा जमेगा | 
विनोभा लिखते हैं मैं जेल में था और दही जमाने को खूब सावधानी रखता था | फिर भी दही कभी जमे, कभी नही जमे, कभी पानी छोड़े, कभी खट्टा हो जाये | माँ के हाथ जैसी दही नही बनती थी | 
मैं ६० करीब हो गया हूँगा तो मेरी माँ ८०-८५ की थी | तबियत भी खराब थी | मेरी माँ को मैंने बोला मैं तुम्हारे हाथ की रोटी खाना चाहता हूँ | मेरे को पता है माँ को तो बुढ़ापा है, मेरे को तो रोटी खिलने वाले लाखो लोग हैं | फिर भी मैंने माँ को बोला, के माँ के हाथ की रोटी का स्वाद ही कुछ निराला है | 
ऐसे ही देवियाँ-माताए अपने बच्चो के लिए भगवान का नाम जपते हुए आटा घून्धो | पति को, पुत्रो को, भगवान के लिए बनाओ | आपका रसोई बनाना भगवान की भक्ति हो जाएगी | फिर प्रभुजी को खिला दो | भगवान को भोग लगा दिया फिर उनको दिया, उन में भी तो भगवान ही खा रहे हैं | क्या करें रसोई बनानी पडती है, माला नहीं होती | अरे माला तो माला रहे लेकिन रसोई को भी माला बना दे | रोने को भी माला बना दे | हे प्रभु, अभी तक संसार सच्चा लग रहा है, सुख-दुःख सच्चा लग रहा है | ऐसे दिन कब आयेंगे के तू सत्य स्वरूप है बाकि सब सपना है | हरी…..ॐ…..हरी ॐ…….| ओ रोना भी हसने में बदल जायेगा | भगवान के साथ कैसे भी करो | पंगा लेना है तो भगवान से लो | लड़ाई करना है तो भगवान से | मथा टेकना है तो भगवान से | सबसे बड़े भगवान, उनसे नाता तो जुड़ जाये | तुलसी अपने राम को रीझ भजो या खीझ, भूमि फेके उगेंगे उलटे-सीधे बीज || शिशुपाल ने भगवान का वैर से नाम लिया तो भी सद्गति हो गयी | पूतना ने भगवान को जहर पिलाया, तो भी सद्गति हुई | यशोदा ने भगवान को मक्खन खिलाया तो भी सद्गति हुई | तुलसीदासजी ने तो भगवान को ऐसे उल्हावने दिए की उनके प्रेम की महानता छलकती है | भगवान को बोलते हैं अँधा-धुन्धी है सरकार तुम्हारी | देखो भगत की कितनी ताकत होती है | बच्चे की कैसी ताकत राजा के कंधे चढ़ जाये | ऐसे ही भगत भगवान के कंधे चढ़ जाये | महाराज अँधा-धुन्धी है सरकार, रीझे दिनी लंक और खीझे दीन्हे परमपद || आप रीझ गये विभीषण पर तो लंकेश बना दिया और खीझे रावण पर तो, पत्नी ले गये, तो परमपद दे डाला | अपनी पत्नी ले गये उसको परमपद दे दिया | और जिसपर रीझे उसको लंक दी | भगवान को बोलो आप तो ऐसी सरकार हो चाहे जैसे हो, पानी में से मोती बरसा देते हो, गूंगे को बोलना सिखा देते हो | कुत्ते के मुंह से मनुष्य की भाषा करा देते हो | हेलिकॉप्टर चूर-चूर होकर पब्लिक के बीच गिरे और सब को बचा लेते हो | कैसी सरकार हो प्रभुजी, प्यारेजी, मेरेजी | भगवान के साथ बाते करो जरा | कभी-कभी हम तो बोलते हैं हे हरी तो बोलता है क्या है | हम तो बहुत मस्ती करते हैं गुरूजी से, भगवान से | 
अपने गुरूजी से वार्तालाप
एक बार गुरूजी को कहा हे मेरे साईं | बोले नही है बात करनी | बोले क्यों ? बोले इतने दिन आया नही, बोलता नही, बुलाता नही | नही बात करनी | अभी भी तो कर रहे हो | नही बात करनी ऐसे करके भी तो कर रहे हो मेरे साईं | बड़ा मजा आया गुरूजी से भी | साईं भी खुश और हम भी खुश | ऐसे भी भगवान से बाते किया करो | खूब आनंद आएगा | अभी देखो कितना आनंद आ रहा है | मेरे को भी आ रहा है | रोते बच्चे थोड़े ही अच्छे लगते हैं, हंसते बच्चे प्यार वाले बच्चे अच्छे लगते हैं | भगवान बोलते हैं खुद के मैं आत्मदेव हूँ | सबके अंदर हूँ | भगवान अपना एड्रेस बताते हैं | ईश्वरो सर्वो भूतानाम, हृदयसे अर्जुन तिष्टति, ब्राह्म्य्म सर्व भुतानी, यंत्र रुड़ानी मायया || मैं ईश्वर सब के हृदय में हूँ, लेकिन मन के यंत्र पर, बुद्धि के यंत्र पर चिंता के यंत्र पर, विकारो के यंत्र पर सब भ्रमित हो रहे हैं | फिर भ्रमित होते हैं तो माया | तो बोले हाँ मुझ देव की माया है | भगवान सत्य स्वीकार ने में देर नही करते | क्योंकी सत्य स्वभाव है भगवान का | भगवान कहते हैं देवी हेशा गुणमयी मम माया धृत्या || ये ३ गुण वाली मेरी माया बड़ी दुस्तर है | कोई शराब-कबाब में सुख खोज रहा है | कोई धन-दौलत बढ़ाने में सुख खोज रहा है | कोई पूजा-पथ में सुख खोज रहा है | और मानता है के ये तो लाभी है | मैं तो पूजा-पथ कर रहा हूँ | कोई बोलता है ये तो शराबी है, मैं तो धनवान हूँ | ऐसे-ऐसे अहम में भर जाते हैं | 
४ मवाली थे बोले मौन रखने में बड़ी शक्ति है | चलो आधा घंटा मौन रखे | मौन तो शुरू हुआ, ५ मिनट में बोला यार, चाबियाँ मैं दुकान की अपने पास लाया हूँ | घर वाले खोजते होंगे | अरे बोले मौन खोल दिया बेवकूफ कहीं का | तीसरे ने कहा बेवकूफ कहीं का मौन खोल दिया ऐसा बोलके तुम भी तो बेवकूफ हो गये | चौथा बोलता है सबसे भले हम अभी तक नही बोले | चारो ने बोल दिया और बोलते हैं सबसे भले हम अभी तक नही बोले | अभी तक नही बोले भी तो बोल दिया | इसी का नाम माया है, उलझ जाते हैं सब | अपने को किसी चीज, वस्तु का मालिक मन लेते हैं | अब शरीर अपना नही है और ये मेरी है, ये मेरी है | इसको ठीक करूं, उसको ठीक करूं | अप्ब्ने को तो तहिक करना छोड़ देते हैं, दुसरो को ठीक करते हैं | ये मेरी माया है | तो भगवान आपकी माया से कैसे तरे ? भगवान बोलते हैं ये माम प्रपनते, वे जो मुझे प्रपनते होते हैं, मुझे सुमिरते हैं, मेरा ज्ञान पाते, वे मुझे पा जाते हैं | जैसे मछुवारा चारो तरफ जाल डालता है, लेकिन जो मछली मछुवारे के पैरों में घूम रही हैं, उनपर मछुवारे की जाल नही जाती | ऐसे ही जो भगवान की शरण जाता है, हरी ॐ….भगवान में आ गये फिर माया में नही फंसोगे | १५ मिनट रोज करो माया से पार हो जाओगे |  
मेरी माँ को देखकर वैद्य ने कहा नाडी विपरीत चाले | मैं गया माँ के पास तो माँ बोली अब मुझे जाने दो | मेरी माँ मेरेको गुरु मानती थी, संत मानती थी | ये उसकी महानता है | बोले मेरे को प्रभु जाने दो | मैंने कहा मैं नही जाने दूंगा | कैसे जाती हो मैं देखता हूँ | मैं आगया संतत्व की मस्ती में | बोले क्या करूं ? मैं मन्त्र देता हूँ | आरोग्य का मन्त्र दिया |और तुलसी, निम्बू का रस देना शुरू किया | रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ गयी | २० ग्राम तुलसी का रस और एक निम्बू पिलाओ रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ जाती है | १ घंटे में मर जाने वाली अब २० घंटे से ज्यादा नही जी सकती, २ घंटे में भी मर सकती है |लेकिन मैक्सिमम २० घंटे | वो माँ तो ठीक होने लगी, २० घंटे हो गये, २० दिन हो गये | अमेरिका के मेरे भक्त आकर देखे लीवर ठीक कैसे हुआ ? किडनी ठीक कैसे हुआ ? ये पीछे के मनके कैसे ठीक हुए | ५०-६० महीने हो गये | कुछ डॉक्टर अच्छे डॉक्टर होते हैं न, समाज में सभी बुरे थोड़े ही होते हैं ? तो अच्छे-अच्छे डॉक्टर हंसी करते, माताजी तुमतो मरने वाली थी, अभी तक जिन्दी हो | तो मेरी माँ भी जरा चुटकी लेती मर जाएगी-मर जाएगी कहने वाले तो बहुत थे उसमें तो कई मर गये | मरना है तो तुम मरो, मेरे पासा मेरे भगवान का मन्त्र है | लो, बीटा प्रसाद खाओ | मेरी माँ भी बड़ा मजाक करती थी | मेरी माँ ८६ साल की थी, ९३ उस समय लीवर-बीवर सब ठीक | ॐ खम-खम समझ गयी मते-बहने-बिटियाँ | 
गाय का महत्व
प्रसूति होते समय, ओपरेशन कराओ, बच्चा टेढ़ा हो गया है, ऐसा है वैसा है | तो गोधरा में एक बहुरानी पहली बार माँ बन रही थी | उसका गर्भ टेढ़ा हो गया, सूज गयी | गोधरा के होस्पिटल ने कहा के जल्दी से पेट चिराओ | उन्होंने सुना हुआ था, मेरे भगत थे | डोक्टारो ने कहा जल्दी पेट चिराओ बच्चे को निकालो दोनों में से कोई १ बचेगा | उन्होंने कहा बापू ने मना किया है | तो फिर अहमदाबाद ले गये | गोधरा से बरोदा, बरोदा से अहमदाबाद | अहमदाबाद में बड़े-बड़े अच्छे डॉक्टर थे | फिर उन्होंने समिति वालो को फोन किया | बोले अब तो सभी बोलते हैं या माँ बचेगी या बालक बचेगा और जो बचेगा वो मेंटली रिटायर होगा | जल्दी से सिजेरियन कराना पड़ेगा बापू आज्ञा दे दो | मैंने कहा नही आज्ञा नही देते | गाये के गोबर का रस ले लो १० ग्राम भगवान का नाम जप करके पिलाओ आधा-पौना घंटे में प्रसूति हो जाएगी | नही हो तो फिर पिला देना | वो तो मेरे को मानते थे | मेरी आज्ञा के सिवाय कैसे कराए ? दे दिया गाये के गोबर का रस | वो बेटी भी चंगी, माँ भी चंगी | दूसरी बेटी हुई, तीसरा बीटा हुआ | सबके सब चंगे | ना माँ मरी, ना बच्चे मरे, ना मेंटली रे\रिटायर हुए | गाये में सूर्य के गौ-किरण पीने की सूर्य केतु नाडी है | इसलिए गाय का दूध पवित्र, गाय का झरण पवित्र, गाय का गोबर पवित्र | मरते समय भी गाये के गोबर का लेपन | है तो डबल गाय का, है तो सिंगल और डबल गाय का मरते समय वहां छिटकाव करते हैं | और श्मशान में भी जाते हैं तो गाय के गोबर का कंडा जलाते हुए जाते हैं ताकि मुर्दे के जो बैक्टेरिया हैं वो दुसरो को तंग ना करें | इतनी ऊँची हमारी संस्कृति है | तो गाय का दूध २ रूपये ज्यादा मिले भेंस से तो भी लेना चाहिए | गाये पालनी चाहिए पाल सकें तो | और कोई बीमार है और डॉक्टर बोले ये ठीक नहीं हो सकता | उस बीमार के आगे गाये रख दो | गाये को थोडा-बहुत खिलावे अपने हाथ से | और गाये के शरीर पे हाथ घुमाये | गाये की प्रसन्नता के वेवज निकलेंगे | उसकी आँख, ऊँगली के अगले भाग से | उसकी रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ेगी और निरोग हो जायेगा | ६-१२ महिना करे | असाध्य रोग भी मिट जाते हैं | 
गठिया की बीमारी है तो ॐ बम-बम जप करे सवा लाख शिवरात्रि के दिन | गठिया सदा के लिए गायब | वायु सबंधी बीमारी है, गैस है, तो १ लिटर पानी में ३ बिली पत्ते, २-३ काली मिर्च डाल कर उबालें अथवा जरा सा अज्वैन | उबाल कर पौना लिटर करें | और वो पानी पुरे दिन पिए | वायु शांत | पीत है आँखे जलती हैं, तो २ लिटर पानी उबल के १ लिटर बना ले | और वो पिए, पीत शांत हो जायेगा | कईयों को सर्दी हो जाती है तो दये नाक से स्वास लें, रोके सवा मिनट, डेढ़ मिनट फिर बाये से छोड़े | ऐसा ३-४ बार करें २ दिन सर्दी भाग जाएगी | सर्दी, खांसी की दवा लेने से कफ सुख जाता है | ट्यूमर बनता है, कैंसर बनता है | हार्ट अटक बनता है | ये अंग्रेजी दवा जहर से भी ज्यादा नुकसान करती है | जहर तो एक बार मारता है, ये तो बार-बार मारता है | खली पेट | 
होली के रंगों की सत्यता
अभी होली आएगी तो लोग होली क दिनों में रंगो से खेलते हैं | ये होली में रंग खेलने की परम्परा हमारी भारतीय संस्कृति की है | लेकिन इसलिए बनाई थी के होप्ली के दिनों में सूर्य थोडा पृथ्वी के नजिक होने से हमारे शरीर पर गर्मी की असर पडती है | कफ पिघलता है, भूख कम हो जाती है | और स्वभाव चिडचिडा होता है | तो स्वभाव चिडचिडा, कफ और बीमारी को नियंत्रित करने वाला पलाश के रंग से होली खेलते थे | अथवा तो दुसरे प्राकृतिक रंगो से | अंग्रेजी शासन के कारण हम पलाश के फुल भूल गये | गेंदे के फुल अथवा महेंदी से, हल्दी रंग बनते है | २०१० की ऋषि प्रसाद पुस्तक में कौन सा रंग कैसे बनता है | जैसे आवले के पावडर को लोहे के बर्तन में भिगोने से काला रंग बनता है | लेकिन केमिकलसे बना काला रंग लेड ऑक्साइड पड़ता है | जो किडनी को खराब करता है | महेंदी से हर रंग तो फायदा करता है लेकिन अंग्रेजी रंग में कॉपर सल्फेट पड़ता है जो आँखों में जलन,. सुजन और अस्थाई दृष्टि कमजोर कर देता है | सिल्वर रंग में एल्युमीनियम ब्रोमाईट पड़ता है जो कैंसर पैदा करता है | अब करोड़ो रूपये के तो हम रंग खरीदे, और अरबो रुपया हम बीमारी के लिए दे | गुलाम बना दिया अंग्रेजो ने | मैंने विरोध नही किया | मैंने पलाश के फूलो से होली खेलना चालू करा | और इन रंगो की पोल प्रजा को सुनाया | नीला रंग प्रेशियन ब्लू पड़ता है जो चरम रोग देता है, खुजली आदि देता है | और लाल रंग में मरक्यूरिक सल्फेट पड़ता है जो त्वचा को कैंसर देता है | और जो बैंगनी रंग मिलता है बजार में उसमें क्रोमियम आयोदाईट पड़ता है जो दमे की बीमारी और एलर्जी देता है | कोई भी रंग निर्दोष नही है तो आप ध्यान रखना होली के दिनों में इन रंगो से खेल कर दुसरो को बीमारी नहीं देना और अपने पैसे को तबाह मत करना | होली खेलना है तो पलाश के फूलो से | पलाश के फुल रत को भीगा दिया सुभ उससे खेले | वर्ष भर रोग-प्रतिकारक शक्ति रक्षा करेगी | होली के १५-२० बाद नमक बिना का भोजन करो | कई बीमारियाँ भाग जाएँगी | नीम के पत्ते १५-२०-२५ कोमल १ काली मिर्च चबाके पानी पियो | जठरा और ये सब ठीक रहेगा | 
अब माघ मॉस में शट-तिला एकादशी आएगी | उसमें स्नान, तील मिला उपटन, तिल मिला भोजन, तील का दान, तील का होम, आदि तील का प्रयोग करने से पूण्यदाई शट-तिला एकादशी हो सकती है | १२ फरवरी को  विष्णु पदी संक्रांति है, , उसमें पुण्यकाल दोपहर को १२:५३ से लेकर सूर्यास्त तक १०,००० गुना फल होगा जप का | १७ फरवरी रविवार की सप्तमी है | लाख गुना फल देगी | सुभ सूर्य उदय से लेकर १२:४८ मिनट तक | आरोग्य का मन्त्र जपोगे तो नोरोग रहोगे | स्वास भरो, रोको, जपो नासे रोग हरे सब पीर, जपत निरंतर हनुमत बीरा || ऐसा सवा मिनट, डेढ़ मिनट स्वास रोक के जपो | फिर छोड़ दो | ऐसा २-५ बार करो फिर १-२ बार स्वास बाहर रख के जपो | फिर छोड़ दो | मन्त्र सिद्धि होगी और रोग जल्दी आएगा नहीं | अथवा दूसरा मन्त्र भी है आरोग्य के | तो आरोग्य का मन्त्र जपोगे तो वो भी निरोगता की सिद्धि और किसी को भी दोगे तो वो भी निरोग हो जायेगा | भूलकर भी रविवार की सप्तमी को संसारी व्यवहार ना हो और भूलकर भी झूट, कपट, बेईमानी मतलब पाप ना हो | जितना पुण्य हो जाये उसका लाख गुना होगा | फिर १८ फरवरी भीष्म पितामह का श्राद्ध, तर्पण दिवस है | जिसको सन्तान नही होती तर्पण दें | २१ फरवरी जय एकादशी | ब्रह्म हत्या जैसे बड़े-बड़े पाप भी नाश होते हैं | और पिशाचत्व की प्राप्ति नही होती | वो आदमी पिशाच नही बन सकता | नही तो मुसोलीन पिशाच बन गया | अब्राहम लिंकन बनके व्हाईट हॉउस में भटकता है | २२ फरवरी तील द्वादशी है | २२ फरवरी को स्नान, दान, होम, भोजन में मतलब फलाहार में तील हो | ब्रह्मपुराण में लिखा है | वो व्याधियों से रक्षा करेगा | 
ॐ कार कंठ से १० बार | २२,००० श्लोक हैं ॐ कार जप की महिमा के | दीक्षा लेने से गुरु-शिष्य के आत्मा एकाकार हो जाती है | तो फिर दुरी दुरी नही रहती | भगवान ने भी ॐ कार मन्त्र की खोज की है | खोज उसी की होती है जो पहले था | निर्माण उसी का होता है जो पहले नही था | ॐ कार मन्त्र और बिज मन्त्र श्रृष्टि के मूल से थे | भगवान ने तो ब्रह्माजी को पैदा किया | उसके पहले ॐ कार मन्त्र था | इसलिए तमाम मन्त्र में ॐ कार की साधना है | 
 
 
 
 

मंत्रो की शक्ति

जनवरी 31, 2013
24th Jan 2013 
Ahemdabad Ashram 
 
माघ मास के दिनों में सभी जल गंगा जल तुल्य हो जाते है | और इसको मनाने वाला व्यक्ति निरोग तो रहता ही है | ऋतू परिवर्तन हुआ तो शरीर में पित का प्रकोप न हो, खुजली की बीमारियाँ न हो | ३२ प्रकार की बीमारियाँ | पित और वायु मिलकर हार्ट अटेक होता है | तो शास्त्रों में लिखा है की भगवान कहते हैं की मैं तपस्या से, व्रत से, उपवास से जो कुछ पुण्य और प्रसन्नता देता हूँ, उससे भी ज्यादा पुण्य होगा माघ स्नान से | अपने शास्त्रों की सच्चाई कितनी ऊँची | माघ स्नान से आपका स्वास्थ और मानसिकता उन्नत होती है | इसीलिए भगवान बोलते हैं मैं प्रसन्न होता हूँ | 
जोगी मछेन्द्र्नाथ की कथा
अभी प्रयागराज में कुम्भ मेला चल रहा है | त्रिवेणी घाट पर लोग नहाते हैं | पूर्वकाल में त्रिवेणी घाट पर राजा का शव | धर्मात्मा राजा प्रजा के बड़े प्रेमी थे | मरण धर्मा शरीर तो मरता ही है, राजा का हो चाहे प्रजा का | राजा मर गया, उसके शव के साथ उसकी रानी कुड्डी की नाई विलाप करती-करती सती होने को अपने पति की श्मशान यात्रा में | जोगी मछेन्द्र नाथ और उनके शिष्य गोरखनाथ से ये दुखद प्रसंग सहा नहीं गया | तो जोगी गोरखनाथ ने कहा की गुरूजी राजा को जीवित किया जाये | नही तो रानी सती हो जायेगी, राजा तो मृत्यु धर्म को प्राप्त हुए | अधिकारी प्रजा का उत्पीड़न करेंगे | राजा के बिना प्रजा का बड़ा अहित होगा | उसके लिए राजा को वापिस बुलाया जाये | तो क्षण भर शांत हुए जोगी मछेन्द्र नाथ | उन्होंने कहा वत्स राजा बड़ा धर्मात्मा था | और ॐकार का उच्चारण करने वाला व्यक्ति, इस ब्रह्मांड को लाँघ कर अनंत ब्रह्मांड से जुड़ जाता है | तो राजा इस ब्रह्मांड में नही है | धर्मात्मा राजा है और ॐकार का उच्चारण करने वाला साधक है | तो इस ब्रह्मांड को लाँघ कर चला गया तो उसको बुलाना सम्भव नही रहा | तो गोरखनाथ ने कहा गुरूजी मैं अपना ये शरीर कहीं रख देता हूँ और उसके शरीर में प्रविष्ट होकर उसे जीवित करता हूँ | मछेन्द्र नाथ ने कहा वत्स, वत्स माने पुत्र, तुम युवा हो और ये साहस की सेवा तुम, झंझट में मत पडो | रानी के भरतार बनना फिर रानी के साथ, तुम्हारे लिए ये उचित नही रहेगा | ये मैं झंझट मोल लेता हूँ | मेरा शरीर यहाँ रखूँगा और शुक्ष्म शरीर से राजा में प्रविष्ट होऊँगा, राजा जीवित होगा | लेकिन तुम मेरे शरीर की निगरानी रखना | जो आज्ञा गुरूजी | मछेन्द्र नाथ अपने सुव्यवस्थित जगह पर ध्यानस्त होगये और शरीर से बाहर आये | शुक्ष्म शरीर से राजा में प्रविष्ट होते ही राजा में हेलचाल हुई | सारी गमी, सारा मातम, सारा दुःख, खुशी और उत्सव में बदल गया | दिन बीते, सप्ताह बीते, महीनों की कतारे बीती | अब एक जगह पर चौकी करना गोरखनाथ के बश का नही रहा | तीर्थ यात्रा करने को निकले | वहाँ के पुजारन को कम सौपा के इस कमरे को, जबतक मैं लौट के नही आता हूँ, १२ साल पुरे होंगे गुरूजी को, तबतक इस कमरे को कोई छुए नही ध्यान रखना | अब मछेन्द्र्नाथ तो गए राजा के शरीर में | राजा के शरीर में तो गए लेकिन थे तो वो जोगी | तो राजा के पूर्व स्वभाव और दूसरे के स्वभाव में फर्क तो पड़ता है | रानी बुद्धिमति थी | और राजा-रानी नजिक होते तो एक-दूसरे को अपने बचपन की बाते बता देते हैं पति-पत्नी को | तो मछेन्द्र्नाथ ने कह दिया होगा के तेरा पति तो मर गया लेकिन तेरी दीन हालत देखकर हम ऐसे आये और फलानी जगह पर मैं अपना शरीर रख दिया हूँ | १२ साल तेरे साथ रहूँगा | दिव्य सन्तान दूँगा | जो भी कहा होगा, मैं अपने अनुमान से कह रहा हूँ | तो उनको सन्तान हुई | ये कामवासना से तो शादी नही हुई थी | प्रजा का पालन करना ये धर्म भाव से, ये बच्चे का नाम, ये नाथ सम्प्रदाय के थे | तो बच्चे का नाम रखा धर्मनाथ | प्रयागराज के राजाओ के इतिहास में नाथ राजा का नाम आता है | वो मछेन्द्र्नाथ ने रानी पर कृपा करके दिया हुआ | 
अभी भी माघ महीने की द्वितीय को धर्मनाथ की याद में धर्म द्वितीय करके मनाते हैं लोग | द्वितीय तिथि आएगी माघ मास की तो उसको धर्म द्वितीय बोलते हैं | तो रानी ने मछेन्द्र्नाथ की घटना जान ली | वो लड़का १२ साल का हुआ | तो मछेन्द्र्नाथ ने उसको राजतिलक करवा दिया | और फिर अपने शरीर में प्रविष्ट होने गए | कथा तो बड़ी आश्चर्य कारक है | के ज्यों रानी को पता चला के मछेन्द्र्नाथ का शरीर वहाँ पर पड़ा है | ये चले जायेंगे तो मैं फिर विधवा हो जाऊँगी | तो रानी थी, शत्रानी थी, कैसे भी करके उसने पुजारन को दबोच लिया या घुस दी | के कमरा खोलकर मछेन्द्र्नाथ के शरीर के ७ टुकड़े करवा दिए | कैसा संसार ? ७ टुकड़े करवा दिए ताकि मछेन्द्र्नाथ अपने शरीर में वापिस ना जाएँ | मेरा सुहाग बना रहे | जोगी गोरखनाथ लौट के आये तो देखा के गुरूजी के शरीर तो अभी है ही नही | ध्यान लगा के देखा के ७ टुकड़े करवा दिए | लेकिन गुरूजी संकल्प करके गए थे तो भगवन का मंत्र-व्न्त्र करके गए थे तो जोगिनियाँ रखवाली कर रही थी | जोगिनियाँ कैलाश ले गयी | गोरखनाथ फिर वहाँ कैलाश पहुंचे | और अपने योगबल से ७ टुकडों में चेतना प्रविष्ट करवा के और म्छेन्द्र्नाथ का शरीर पूर्व व्रत हो गया | और जब म्छेन्द्र्नाथ को आना था तो उस शरीर में प्रविष्ट हो गए | और राजा जल पड़ा | ये कथा ज्ञान वर्धक तो है | योग सामर्थ सम्पन तो है | 
ऐसी ही एक दूसरी कथा भी है | यात्रा करते-करते जोगी मछेन्द्र्नाथ, गोरखनाथ आये तालाबों के किनारे | गाँव से थोडा हट के कुछ तालाब था | शांत वातावरण था | गाँव का नाम था कनक गाँव | मध्यप्रदेश में | वत्स यहाँ तुम संजीवनी मंत्र सिद्ध करो | म,मंत्र में बड़ी शक्ति होती है | और बिज मंत्र २१ होते हैं | उसमें तो अद्भुत शक्ति होती है | सूर्यनारायण में ये ४ बिज मंत्र जोड़े हैं | कैसा भी आदमी हो, बिज मंत्र बच्चे पढ़े, तो कैसे भी बच्चे हो तेजस्वी हो जायेंगे | ॐ ह्रां ह्रीं सह सूर्याय नमह || ऐसा मंत्र जपे और सूर्य नारायण का भरू मध्य में ध्यान करे | बड़े बुद्धिमान हो जायेंगे | बाल संस्कार वालों को भी कराया जा सकता है | ४ बिज मंत्र हैं | 
कोई खतरनाक आपदा आ गयी हो, चारो तरफ से मुसीबत में घिर गया हो तो फिर ३ दूसरे बिज मंत्र हैं, वो जप करें तो सरे विपदा वाले एक तरफ | आप सफल हो जायेंगे | ऐसे ॐकार मंत्र की अपनी शक्ति है | तो ॐकार मंत्र तो कई बिज मंत्रो के साथ भी लगता है | जैसे श्री कृष्ण का नाम तो वैसे ही भगवान का नाम है लेकिन बिज मंत्र लगता है तो वो नाम भी विशेष और प्रभावशाली होता है | जैसे कृष्ण-कृष्ण ये तो अकेला नाम है, कलीम कृष्णाय नमह और प्रभावशाली हो जायेगा ज्यादा | राम-राम अच्छा मंत्र है | रामजी के प्राकट्य के पहले वेदों में इसकी महिमा आती है | राम के रकार से सूर्य तत्व और मकर से चन्द्र तत्व शरीर में विकसित होता है | हाई बी.पी., लो बी.पी. से बचाता है और अध्यात्मिक उन्नति कराता है राम नाम मंत्र | लेकिन उस राम मंत्र में ह्रीं मिला दो तो बिज मंत्र होता है ह्रीं | ऐसे ही बम-बम शिवजी का बिज मंत्र है | तो बम-बम सवा लाख जप करे तो शिवरात्रि के दिन तो गठिया ठीक हो जाता है | किसी को हो गया उसने किया तो मुझे बताया के बापू आपके सत्संग से सुनके मेरा गठिया ठीक हो गया | घुटनों का दर्द, वायु ये सब बीमारी मिटाना है तो बम-बम जप करो | 
तो एकांत में कनक गांव जोगी गोरखनाथ साधना करते थे, जप करते थे | संजीवनी विद्या का, बिज मंत्रो का जो भी | बच्चे कभी खेलने आ जाते तो तलाव की चिकनी-चिकनी मिटटी लेकर बच्चो ने बैल-गाड़ी बनाई | देहात के बच्चे थे तो बैल-गाड़ी का मोडल बनाया | बैल-गाड़ी तो बन गयी, बैल भी खड़े हो गए लेकिन चालक बनाने में बच्चे विफल हो रहे थे | तो जोगी गोरखनाथ पर नजर पड़ी | तो सब बच्चे बोले बाबा, बैल-गाड़ी तो हमने बना दी, मिटटी तो हम लाकर देते हैं ढेर | एक मनुष्य बना दो हम बैल गाड़ी पर उसको बिठाएंगे | बाबा ने उनको समझाया के ये सब हम नही करते, नही जानते | बहुत आग्रह किया तभी बाबा ने उनको समझा के भेज दिया | दूसरे दिन सुबह आ गए फिर | हम तो नही बना पते बाबा आप कैसे भी हो हमको भले छोटा बना दो | बच्चा ही बना दो | हमलोग चलते हैं बैलगाड़ी, बच्चे हैं तो | बहुत बच्चों ने बाल हट किया तो, नम्रता किया तो जोगी गोरखनाथ के मन में आगयी दया | तो उसने मिटटी लेकर एक पुतला बनाया | बच्चे का पुतला बनाने में लगे | लेकिन उनको पता ही नही था मैं इस संजीवनी मंत्र का अनुष्ठान क्र रहा हूँ तो अनुष्ठान का ऐसा प्रभाव होता है | 
हमारे छिंदवाडा आश्रम में रहने वाली बच्चियाँ हरी ॐ का अनुष्ठान करती हैं तो ॐ है तो उनके जप के प्रभाव से, बैंगन को पानी पिलाती हैं तो, फिर बैंगन काटती हैं तो उसमें से ॐ निकल आता है, आकृति | कई महिलाए भोजन बनती हैं, हरी ॐ, ॐ जप है उनका तो भोजन में रोटी के उपर ॐ उभर आता है | ॐ बिज मंत्र का अकाट्य प्रभाव होता है | ये बहुत ऊँची उपलब्धि है, उपासना के जगत में | साक्षात्कार तो परम ऊँचा है लेकिन ये भी अच्छी, सात्विक ऊँचाई है | 
तो जोगी गोरखनाथ वो पुतला बनाते गए और संजीवनी विद्या का मंत्र पढ़ते गए | तो ज्यों पुतला तैयार होने को है तो उसमें हेल-चाल होने लगी | पूरा बनाया तो वो बच्चा, बच्चे कई जो चेष्टा होती है वो हुई | भूत-भूत …गाँव में भाग गए | कनक गाँव में खबर पड़ी लोग आये बोले कैसे ? गाँव वालों ने देखा गोरखनाथ के संजीवनी मंत्र के प्रभाव से ऐसा हो गया है | 
मधु नाम के ब्राह्मण थे और उनकी पत्नी थी गंगा | उनको सन्तान नही होती थी | उनके मन में हुआ की जोगी ने जो सन्तान बनाई वो हमको मिल जाये तो कितना अच्छा | रात भर वही विचार और स्वप्ने चलते रहे | सुबह को आये जोगी के आगे प्रार्थना किया  | तो बोले अच्छा तुम तैयारी करो और हम धाम-धूम से ये बालक आपको गोद देते हैं | कभी-कभी हम आयेंगे उस बालक को संस्कार देंगे | लेकिन ये बालक तुम्हारे घर में सदा नही रहेगा | ये तुम्हारी ७ पीढियाँ तार देगा | बालक का नाम घहेनिनाथ रख दिया | चौरासी सिद्धो में घहेनिनाथ एक सिद्ध पुरुष हो गए | भारत के कैसे-कैसे योगी हुए | 
हेलिकॉप्टर लोगो के बीच गिरा | उसके पुर्जे-पुर्जे हो गए | किसीको चोट नही लगी | सफेद पेट्रोल आग पकड़ने वाला होता है | आग भी निकली, पेट्रोल भी बहा, लेकिन पेट्रोल और आग के बीच में कैसे म,मंत्र रक्षा, आग नही लगी | आग लगती तो हम सब स्वाह हो जाते | तो ना हमको चोट लगी, हमारे साथ जो भक्त थे ना उनको चोट लगी | हेलिकॉप्टर पब्लिक के बीच गिरा था | सब दौड़ते हुए दीखते हैं | उनको भी कोई पुर्जा उड़के नही लगा | अगर छोटा सा भी पुर्जा उड़ के लगता तो घायल हो जाते लोग | बिना चोट के यात्रा हो ऐसा ॐ त्रय्मभक्म यजामहे सुगंधिम पुष्टि वर्धनम, मैंने वो मंत्र नही किया था लेकिन कोई घर से निकले और वो जप करे तो एक्सीडेंट से सुरक्षित हो जायेगा | ऐसा मंत्रो की शक्ति है | शादी-विवाह होता है, कोई बड़ा काम है, कोई बारात लेकर जा रहे हो, कोई जंगल है या कुछ भी है | ॐ नमो भगवते वासुदेवाय की एक सौ आठ बार आवृति कर लो | एक माला जपो तो तुम्हारा शादी-विवाह या कोई बड़ा कार्यक्रम है तो उसमें विघ्न आयेंगे तो उसी समय उसी मंत्र को फिर से दोहरा दो | वासुदेव तो सर्वत्र है | सुरक्षा कर लेंगे | रक्षा कवच ॐ नमो भगवते वसुदेवाए || तो घेमिनाथ, गोरखनाथ और म्छेन्द्र्नाथ आते-जाते रहे कनक गाँव में | दीक्षा दिया, जप और ध्यान सिखाया | 
प्राणायाम
अब बाये से स्वास लिया दाये छोड़ा, दाये से लिया बाये छोड़ा | २-४ अनुलोम-विलोम प्राणायाम किया | जब स्वास लें तो उसमें ॐ स्वरूप इश्वर का नाम भरना है | स्वास लो और ॐ, ॐ परमात्म नमह २-५ बार फिर स्वास निकल दो | ऐसे २-५ प्राणायाम किया फिर दोनों नथुनों से स्वास लो | ये ॐकार मंत्र है, गायत्री छंद है, परमात्मा ऋषि हैं, अन्तर्यामी देवता हैं | हम इसका जप करते हैं बुद्धि शक्ति विकसित करने के लिए | ॐ….कंठ से उच्चारण कीजिये | ये २ बार करके फिर भगवान की, गुरु की, ॐकार की मूर्ति के सामने देखना है | आँखों की पलके ना हिले | एक मिनट अगर आँखों की पलके ना हिले ऐसे देखते हो तो मन एकाग्ढ़ होने लगेगा | अथवा दूसरा तरीका है उपर के दांत थोड़े उपर और नीचे के दांत थोड़े नीचे | होंठ बंद | जीभ उपर नही, नीचे नही बीच में खड़ी रखे | और देखते रहे | अगर आँखे बंद करनी है तो कर सकते हैं | और वहाँ जीभ पर मन लगा लो | १ मिनट और जीभ बीच में स्थिर हो गयी तो मन एकाग्र होने लग जायेगा | और एकाग्रता से सारी समस्याओं का समाधान हो जाता है | आत्मा की शक्ति आती है मन में | निर्णय शक्ति, विचार, ये-वो सब विकसित हो जाता है | तीसरा है पैर के अंगूठे २ उँगलियों से अच्छी तरह पकड़े | और फिर अंगुठो के नाख़ून पर दृष्टि जमा दी | मन शांत होने लगेगा | चौथा है टंक विद्या | थोड़ी देर करके जप करे तो मन अपने आप शांत हो जायेगा | पाँचवा है लम्बा स्वास लो ॐ का प्लुत उच्चारण करो | ऐसे प्लुत उच्चारण करते रहे, एकटक देखते रहे | पलके हिले ना हिले, १५ मिनट के बाद म,न में आत्मिक संचार के दिव्य सद्गुण और शरीर में आरोग्य के कण बनेंगे | और भगवान प्रसन्न होंगे | क्योंकी ये ॐकार मंत्र के देवता अन्तर्यामी परमात्मा हैं | इस ॐकार मंत्र की शक्तियाँ खोजने वाले भगवान नारायण स्वयं हैं | ॐकार मंत्र की छंद गायत्री है | जिसमें भी भागवत प्रभाव होता है मंत्र में उसकी छंद गायत्री हो जाती है | तो ॐकार मंत्र है, गायत्री छंद है, परमात्मा ऋषि हैं, अन्तर्यामी देवता हैं | क्यों जपते हो ईश्वर प्रीति अर्थे | अथवा सद्बुद्धि प्राप्ति अर्थे | अथवा आरोग्य प्राप्ति अर्थे | जप करते समय फिर तरीका ये भी है | दोनों कण में ऊँगली डालो | घर स्वास लो ॐ स्वरूप ईश्वर का नाम भरो उसमें | स्वास रोको, मैं भगवान का भगवान मेरे हैं | मैं स्मृति, प्रीति अन्तर्यामी में बढ़ाने के लिए जप करता हूँ | ॐ कंठ से उच्चारो | प्यार से | ॐ…..| 
ऐसा सुबह, दोपहर, शाम करने से प्रसन्नता बनी रहेगी, संसार में सहेज सफलता और ईश्वर प्राप्ति भी सहेज | 
गोविन्द हरे, गोपाल हरे, सुखधाम हरे, आत्मराम हरे || – कीर्तन – गोविन्द हरे, गोपाल हरे, जय-जय प्रभु दीनदयाल हरे, सुखधाम हरे, आत्मराम हरे || हरी ॐ……
ऐसी संतो की संगत रहे तो दुःख-चिंता नही रहती | 
योग्व्शिष्ट
हे रामजी जिसका आत्मज्ञान रूपी सूर्य उदय हुआ है, उसीका जन्म और कुल सफल होता है |
बापूजी :  जिसके हृदय में आत्मज्ञान उदय हुआ है, उसका जीवन सफल है | बाकि तो इंद्र बनने के बाद भी कुछ नही | पी.एम्., की.एम्. होने के बाद भी कुछ नही, धोखा है | 
जो पुरुष आत्मचिंतन का अह्यास करता है, वही शांति पाता है | बुद्धि श्रेष्ठ और सत्शास्त्र वही है जिसमें संसार से वैराग्य और आत्म तत्व की चिंतन उपजे | जब जिव आत्म पद को पाता है, तब उसके सरे क्लेश मिट जाते हैं | और जिसकी आत्मचिंतन में रूचि नही वे महा अभागी हैं | 
बापूजी :  अभागे हैं जिनको आत्मचिंतन में रूचि नही है | परमात्मा शांति नही पाते | ये खाऊ, इधर जाऊ, बड़े अभागे हैं | 
बम्बई से ७०-७५ किलोमीटर दुरी पर गणेशपुरी है | हमारे गुरूजी एकांत में व्भन | किसी का बंगला था | फोरेस्ट जैसा माहोल था | वहाँ रहे थे तब मैं उधर गया था | वहीं साक्षात्कार हुआ| तो वहाँ मुक्तानान्दजी का आश्रम है | मुक्तानान्दजी के गुरु थे नित्यानंदजी | लोग बहुत सम्पर्क किये फिर उब गए | नानकजी भी ऐसे ६० साल की उम्र में तो लोगो को भगाने के लिए पत्थर मरते, उग्र रूप धारण कर लिया | भीड़-भाड समय बर्बाद करते हैं | ऐसे लोग खुद का भी समय बर्बाद करते हैं संतो का समय भी बर्बाद करते हैं | ऐसे लोगो से बचने के लिए नानकजी ने उग्र रूप धारण किया पत्थर मारते थे | ऐसे मुक्तानंद के गुरु नित्यानंद भी पत्थर मारते थे | वे सत्संग को मनोरंजन में खत्म करने वाले पापी लोग होते हैं | जो दूसरों का सत्संग बिगाड़ते हैं, आज्ञा नही मानते है वे पापी लोग होते हैं | मंदा सु मंद मत्या मंद मती के होते हैं, दुर्बुद्धि होती है जो गुरु की बात को हँसी-मजाक में ले लेते हैं | गुरु की आज्ञा का आदर नही करते | 
बाकें बिहारी भगवान के पास गए भगत | हे भगवान मुझे सुख दो | भगवान ने सोचा इसको सुख चाहिए तो मैं तो सुख देने को तैयार हूँ | शांत सुख चाहिये, अथवा हृदय में मेरी वार्ता का सुख चाहिये जो भी सुख है मैं दे सकता हूँ | मेरे पास सुख ही सुख है | सुख पूर्वक वायु बहता है | सुख पूर्वक गंगाजी बहती हैं | सुख पूर्वक नैनो से संतो के अथवा भगवान के वाएबरेष्ण निकलते हैं | लेकिन वो भगत बोले मुझे सुख दो | भई कैसा सुख चाहिये ? बोले मुझे पुत्र का सुख चाहिये | तो भगवान सोच में पद गए | सीधा सुख मांगते तो अभी दे देता | मुस्कान से, शांति से, अंदर में, आत्मा में | अब इसको पुत्र का सुख चाहिये | तो देखना पडेगा इसके प्रारब्ध में क्या है | तो बोले भगवान जल्दी मुझे पुत्र प्राप्ति हो | भगवान को डिस्टर्ब कर दिया | भगवान देखे, सोचे, जल्दी पुत्र प्राप्ति हो | जल्दी कैसे करें सुख दें तो बोले सुंदर होना चाहिये | पुत्र भी चाहिये सुंदर भी होना चाहिये | एक वर्ष के अंदर दे देना | बुद्धिमान भी हो | और आज्ञाकारी भी हो | दबंग भी हो और कहने में भी चले | भगवान अब चुप रह गए | बोले ये तो मेरेको नौकर भी ऐसा बनाता है की मैं फेल हो जाऊ | लड़की आई मुझे ऐसा पति मिले शेर जैसा | और मेरे कहने में चले | अब शेर जैसा और कहने में कैसे चलेगा | आदमी आया मुझे शादी हो, लडकी बड़ी खुबसुरत हो | स्वर्ग की परी जैसी सुंदर मिले तब मैं खुश होऊंगा | लेकिन ये ध्यान रखना प्रभु उसकी तरफ कोई बुरी नजर से देखे नही | अरे पागल सुंदर होगी तो लोग देखेंगे | अब ठाकुरजी को भी ऐसा कर देते हैं के ठाकुरजी नौकर बनके भी उनकी सेवा करे तो फेल हो जाये | फिर ठाकुरजी बोलते हैं जाओ मरो | बकते रहो, प्रार्थना करते रहो | बाकि जो प्रेमी होते हैं उनसे तो रूबरू हो जाते हैं | कभी प्रेमी ठाकुरजी के पास जाते हैं तो कभी ठाकुरजी प्रेमी के पास आ जाते हैं | लेकिन जो भिखमंगे होते हैं न ऐसा दो, ऐसा दो | जख मार-मार के थको | संत भी, ठाकुरजी भी उपराम हो जाते हैं | 
फिर बद का पेड़ लगा दो जाओ उधर फेरे फिरो | ऐसे लोगो से जान छुडाने के लिए जाओ | भगवान से प्रेम करो तो प्रेम स्वरूप भगवान प्रकट हो जाये | लेकिन भगवान को गुलाम का गुलाम बना देते हैं | धन चाहिए और इतने समय में चाहिये | मकान चाहिए और ऐसा चाहिए | इच्छा से खुद भी प्रेषण और संत और भगवान को भी परेशान करते हैं | इच्छा नही है तो भगवान और उनका आत्मा एक साथ | गुरु का आत्मा और तुम्हारा आत्मा एकसाथ |